Why Monsoon 2019 is delayed: Know What are the causes Behind, Does el nino cause | अल नीनो की वजह से मानसून में देरी हुई, लेकिन इसके ये मायने नहीं कि इस बार देशभर में कम बारिश होगी

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  • 8 दिन की देरी से मानसून शनिवार को केरल पहुंचा, आमतौर पर 1 जून को टकराता है
  • स्काईमेट ने 93% और मौसम विभाग ने 96% बारिश की संभावना जाहिर की
  • स्काईमेट के वैज्ञानिक महेश पलावत का कहना है कि अल-नीनो की वजह से मानसून में देरी आई, जुलाई के दूसरे हफ्ते तक इसका असर कम होगा

नई दिल्ली. मानसून 8 दिन की देरी के बाद शनिवार को केरल पहुंच गया। आमतौर पर ये 1 जून को केरल से टकराता है। मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, दक्षिण में लक्षद्वीप के ऊपर चक्रवाती क्षेत्र बना हुआ है। दक्षिण-पूर्व अरब सागर में लो प्रेशर क्षेत्र भी बन रहा है। स्काईमेट ने इस साल 93% और मौसम विभाग ने 96% बारिश की संभावना जाहिर की है। स्काईमेट के वैज्ञानिक महेश पलावत का कहना है कि अल-नीनो की वजह से इस बार मानसून में देरी हुई है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि मानसून के देरी से आने का मतलब ये नहीं कि इस बार देशभर में कम बारिश होगी। 

 

साभार: मौसम विभाग

जून में कमजोर रहेगा मानसून, जुलाई में तेजी आएगी

  • स्काईमेट के वैज्ञानिक महेश पलावत का कहना है कि इस बार मानसून पर अल नीनो का असर देखने को मिला है जिस वजह से मानसून में देरी हुई है। अल नीनो की वजह से पूर्वी प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ जाता है, जिससे पेरू और दक्षिणी अमेरिका में तो ज्यादा बारिश होती है लेकिन दक्षिण-पूर्व में कम बारिश होती है। हालांकि, जुलाई के दूसरे हफ्ते से अल-नीनो का असर कम होने लगेगा जिसके बाद अच्छी बारिश होने की संभावना है।
  • प्री-मानसून बारिश के भी सामान्य से कम रहने पर महेश बताते हैं कि जो वेदर सिस्टम बनते हैं, इस बार उनका असर कम देखने को मिला। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से बनने वाली हवाएं कम आईं। लेकिन 12 जून के बाद फिर से प्री-मानसून एक्टिविटी बढ़ेगी। उनका कहना है कि, इस साल मानसून जून में कमजोर रहेगा लेकिन जुलाई में तेजी आने की उम्मीद है। इस साल 90-95% बारिश होने की संभावना है। केरल और कोस्टल कर्नाटक में बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है। जबकि, बिहार, झारखंड, उत्तरी कर्नाटक, विदर्भ, मराठवाड़ा और गुजरात के कई हिस्सों में कम बारिश होने की संभावना है। 
  • मानसून के देरी से आने पर क्या बारिश पर कोई असर पड़ता है? इस बारे में महेश बताते हैं कि मानसून के देरी से आने पर मानसून पर कोई असर नहीं पड़ता। कई बार मानसून जल्दी आता है लेकिन उस साल बारिश कम होती है और कई बार मानसून देरी से आता है लेकिन बारिश अच्छी होती है।

भास्कर नॉलेज: 887 मिमी बारिश को माना जाता है सामान्य

मौसम विभाग के मुताबिक, 96% से 104% के बीच हुई बारिश को सामान्य या औसत माना जाता है, लेकिन इस साल सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। सामान्य में 887 मिमी बारिश होती है जबकि इस बार 825 मिमी बारिश होने की संभावना है। आमतौर पर 1 जून को केरल के रास्ते से मानसून आता है और 30 सितंबर को राजस्थान से मानसून की वापसी होती है। 2017 में देश में 95% और 2018 में 91% बारिश हुई थी। यानी, पिछले दो साल से लगातार सामान्य से कम बारिश हो रही है। 



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