video: DRDO chief G Satheesh Reddy explains ‘Mission Shakti’ | सैटेलाइट मार गिराने के बाद पहली बार सामने आया DRDO, बताया- कब ली थी पीएम मोदी से इसकी परमिशन

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नेशनल डेस्क, नई दिल्ली मिशन शक्ति’ की सफलता के बाद डीआरडीओ ने ‘मिशन शक्ति’ से जुड़ा एक वीडियो पेश किया है. डीआरडीओ की तरफ पेश वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे ‘मिशन शक्ति’ को सफल बनाया गया। इसमें कौन-कौन लोग शामिल रहे। वीडियो में बताया कि इस मिशन के लिए डीआरडीओ ने पीएम मोदी से 2014 में ही बात की थी।

पीएम मोदी की अनुमति के बाद इस मिशन को सफल बनाने के लिए 200 वैज्ञानिकों की टीम ने दिन-रात मेहनत की। 27 मार्च को धरती से 300 किमी दूरी पर स्थित एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराकर वैज्ञानिकों ने इस मिशन को सफल बनाया।


मिशन शक्ति’ नाम के इस मिशन को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने सफल बनाया है। अब तक दुनिया के तीन देश अमेरिका, रूस और चीन को यह उपलब्धि हासिल थी अब भारत चौथा देश है, जिसने यह सफलता प्राप्त की है।

पीएम ने बताया था कि कि एलईओ सैटेलाइट को मार गिराना एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था, इस मिशन को सिर्फ 3 मिनट में पूरा किया गया। पीएम मोदी ने बताया था कि हमारे वैज्ञानिकों ने स्‍पेस में 300 किमी दूर एलईओ ऑर्बिट को मार गिराया है। ये एक पूर्व निर्धारित लक्ष्‍य था। इसे ए-सेट मिसाइट से तीन मिनट में मार गिराया गया। मिशन शक्ति बेहद कठिन ऑपरेशन था।

डीआरडीओ के प्रमुख जी. सतीश रेड्डी

वहीं, दूसरी तरफ डीआरडीओ के प्रमुख जी. सतीश रेड्डी ने कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शानिवार को कहा कि मिशन शक्ति की प्रकृति ऐसी है कि इसे किसी भी सूरत में गोपनीय नहीं रखा जा सकता है। क्‍योंकि उपग्रह को दुनिया भर के कई स्टेशनों द्वारा ट्रैक किया जाता है। उन्‍होंने यह भी कहा कि इस मिशन के लिए सभी जरूरी अनुमति ली गई थी।

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

दरअसल, इस मिशन पर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने बीते दिनों मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि उपग्रह को मार गिराने की हमारे पास क्षमता कई वर्षों से रही है। सूझबूझ वाली सरकार देश की इस क्षमता को गोपनीय रखती है। केवल न समझ सरकार ही देश की रक्षा क्षमता का खुलासा करती है। डीआरडीओ प्रमुख ने कहा कि अंतरिक्ष को सैन्‍य क्षेत्र में भी महत्‍व मिला है।





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