Usha Martin’s ousted promoter BK Jhawar vouch to fight back | बसंत झवर का आरोप- एमडी ने कंपनी के पैसे से 100 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीदी

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  • कंपनी के पूर्व चेयरमैन बसंत झवर पिछले हफ्ते बोर्ड से बाहर किए गए
  • इसके लिए उन्होंने छोटे भाई ब्रज किशोर और उनके गुट को जिम्मेदार बताया
  • ब्रज किशोर के बेटे राजीव उषा मार्टिन के एमडी

कोलकाता. स्टील और वायर कंपनी उषा मार्टिन के बोर्ड से बाहर हुए पूर्व चेयरमैन और फाउंडर-प्रमोटर बसंत कुमार झवर (83) ने सोमवार को एमडी राजीव पर फंड डायवर्ट करने के आरोप लगाए। उन्होंने अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के संकेत भी दिए। हालांकि, उन्होंने अपनी योजना के बारे में साफ-साफ कुछ नहीं बताया। उन्होंने कहा कि वो छोटे भाई ब्रज किशोर झवर के गुट द्वारा कंपनी के पैसे का डायवर्जन रोकने की हरसंभव कोशिश करेंगे। पिछले हफ्ते हुई ईजीएम में बसंत कुमार को बोर्ड से बाहर कर दिया गया था।

राजीव ने अपनी शेल कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिलवाया: बसंत

  1. बसंत का कहना है कि उषा मार्टिन के एमडी राजीव (ब्रज किशोर के बेटे) ने कंपनी का फंड डायवर्ट कर सिंगापुर में 100 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी खरीदी। साथ ही अपनी शेल कंपनी को 30-40% ज्यादा दरों पर 1.7 करोड़ डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिलवाया। बसंत के आरोपों पर राजीव और ब्रज किशोर झवर की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  2. उषा मार्टिन के कंट्रोल के लिए दोनों भाइयों (बसंत और ब्रज किशोर झवर) ने एक-दूसरे के खिलाफ कई मुकदमे कर रखे हैं। पिछले हफ्ते ईजीएम में छोटे भाई ब्रज किशोर के गुट ने बसंत का समर्थन नहीं किया था। बसंत को सिर्फ 32.7% वोट मिले। 67.3% वोटिंग उनके खिलाफ हुई।

  3. कंपनी ने बयान में कहा है कि बोर्ड और शेयरधारकों ने स्टील कारोबार टाटा को बेचने का फैसला किया था। इसकी प्रक्रिया जारी है। कोर्ट में विचाराधीन मामलों पर कंपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकती।

  4. बसंत झवर ने कहा कि ब्रज किशोर के बेटे राजीव और उसके साथ के लोगों ने मुझे बोर्ड से बाहर कर दिया। जबकि राजीव के नेतृत्व वाले प्रबंधन ने मुझे बोर्ड में बनाए रखने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन, शेयरधारकों ने मेरे खिलाफ वोटिंग की। उन्होंने दो परिवारों के बीच शेयरहोल्डिंग के समझौते का उल्लंघन किया।

  5. झवर भाईयों के बीच 2017 से विवाद चल रहा है। उस वक्त बड़े भाई बसंत के बेटे प्रशांत को चेयरमैन के पद से हटाया गया था। कंपनी ने कर्जदाताओं ने यह मांग की थी।





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