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These Important Trends Happened In Banking Sector During 2018 – 2018 में बैंकिंग उद्योग पर इनकी पड़ी बड़ी मार, इन ट्रेंड्स ने किया प्रभावित

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वर्ष 2018 समाप्त होने को है। यह समय इस साल बैंकिंग उद्योग को प्रभावित करने वाले कुछ बड़े प्रभावकारी ट्रेंड्स और उद्योग एवं ग्राहक के लिए उनके निहितार्थ पर सोचने का है। यह कहना उचित होगा कि बैंकिंग उद्योग के लिए यह मंदा साल नहीं रहा है।

इस साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले आये, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआइ) के विनियम आये और उभरती तकनीकी चलन देखने को मिले। आगे इन सभी पर एक राउंडअप पेश करने की कोशिश की गयी है।

आधार सम्बन्धी फैसला 

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल सितम्बर में एक फैसले में प्राइवेट कंपनियों द्वारा आधार आधारित ई-केवाईसी और ई-साइन सेवाओं के प्रयोग को अमान्य कर दिया। किन्तु दिसम्बर में सरकार ने बैंक खाता खोलने या मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए आधार को स्वैच्छिक बनाने का संशोधन अनुमोदित कर दिया। फैसले से उद्योग में, विशेषकर विशुद्ध डिजिटल प्रस्तावों पर अपना मॉडल तैयार करने वाली कंपनियों में चिंता की लहर दौड़ गयी।

ई-केवाईसी एक परिवर्तनकारी सिद्धांत है। इसके कारण ग्राहकों को काफी सुविधा मिली और संस्थानों को भी अपनी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करने और ज्यादा कुशल बनाने में मदद मिली। इसे स्वैच्छिक बनाने के हालिया कदम का उद्योग द्वारा स्वागत किया गया है।

ग्राहक पर असर : हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आधार के प्रयोग की संवैधानिक वैधता पर मुहर लगी और आधार के विवरण साझा करने का विकल्प ग्राहकों पर छोड़ दिया गया, किन्तु कोर्ट ने इसके प्रयोग के मामले में  निजी कंपनियों और विशेषकर दूरसंचार कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के पर कुतर दिए।

इससे निःसंदेह नए ग्राहकों को जोड़ना औरर भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। उम्मीद है कि 2019 में आधार के स्वैच्छिक प्रयोग की अनुमति देने वाले रेगुलेशंस पारित हो जायेंगे। 

अप्रैल 2019 से मिलने वाले खुदरा/सूक्ष्म, लघु और मंझोले उद्योगों (एमएसएसई) के फ्लोटिंग रेट लोन के लिए आरबीआइ द्वारा समान मानदंड सुनिश्चित करने के दिशानिर्देश लागू करने की उम्मीद है। अभी तक हमने जो समझा है वह यह है कि दरों को आरबीआइ द्वारा निर्धारित एक बाहरी मानदंड के साथ सम्बद्ध करने की ज़रुरत है, और मानक दर (बैंक द्वारा जैसा निर्णय हो) ऋण की पूरी अवधि में अपरिवर्तित रहनी चाहिए, जब तक कि ऋणी के क्रेडिट मूल्यांकन में ठोस बदलाव नहीं हो जाता। 

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का संकट 

एएए-रेटेड कंपनी, आइएलएंडएफएस की अल्पकालिक देनदारियों में चूक के कारण सभी एनबीएफसी में भरोसे का संकट पैदा हो गया। फलस्वरूप विभिन्न म्यूच्यूअल फंड और बैंक एनबीएफसी के लिए कमर्शियल पेपर (वाणिज्यिक विपत्र) के नवीकरण से हाथ खींचने लगे, जिससे इस क्षेत्र के लिए लिक्विडिटी की कमी हो गयी। 

अच्छी वित्तीय स्थिति वाले ग्राहकों को ऋण देने वाले स्रोत उपलब्ध होते रहेंगे। उच्चतर जोखिम प्रोफाइल, अनियमित नगदी आमद, आदि वाले ग्राहकों को फण्ड प्राप्त करने में थोड़ी कठिनाई झेलनी पड़ सकती है क्योंकि यह बाज़ार काफी हद तक एनबीएफसी द्वारा पोषित है। 

यूपीआई 2.0 

अगस्त 2016 में आरम्भ होने के बाद से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (यूपीआई) में जबरदस्त वृद्धि देखी गयी है, जैसा कि 128 बैंक यूपीआई पर आश्रित हैं और नवम्बर 2018 में इसके माध्यम से 525 मिलियन ट्रांजेक्शन निष्पादित किये गए।

यूपीआई ट्रांजेक्शन के मासिक परिमाण में इस वर्ष अप्रैल से सितम्बर तक 114 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है, जबकि ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) ट्रांजेक्शन में उसी अवधि के दौरान 5 प्रतिशत वृद्धि हुयी। यह अल्प नगदी अर्थव्यवस्था की दिशा में एक संकेत है जो सुविधाजनक भुगतान विधियों द्वारा प्रेरित है। 

यूपीआई 2.0 एक आकर्षक नया अवतार है जिसने अनेक विशेषताओं को लागू किया है और कर रहा है, जिनसे ग्राहकों और व्यवसायों के सुखद अनुभव में वृद्धि होगी। पर्सन टू पर्सन (पी2पी) भुगतान ट्रांजेक्शन में आसानी के बाद इन नई विशेषताओं से पर्सन टू मर्चेंट (पी2एम) और उधार संबंधित ट्रांजेक्शन का अनुभव बेहतर होगा। आगे, एनपीसीआइ ने भी अपने नए रिलीज़ में आशय और क्विक रिस्पांस (क्यूआर) कोड आधारित ट्रांजेक्शंस में डिजिटल सिग्नेचर अंतस्थापित करके सुरक्षा उपायों को बढ़ा दिया है। 

वित्तीय संस्थान पूरे उत्साह के साथ डिजिटलीकरण पर लगातार फोकस कर रहे हैं। भुगतान के क्षेत्र में सार्थक  डिजिटलीकरण के बाद इस वर्ष हम लोन देने में नवाचार देख रहे हैं। थर्ड पार्टी पोर्टल के माध्यम से तत्काल लोन की सुविधा नई पेशकशों में से एक है, और इसमें तेजी आ रही है।

ऑनलाइन और तत्काल बैंक खाता खोलने में भी काफी बढ़ोतरी हुयी है, विशेषकर नवयुवकों के बीच इस उत्पाद का अधिक आकर्षण है। एक और प्रमुख ट्रेंड है, ग्राहक संवाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/बॉट्स आदि का प्रयोग और आतंरिक प्रक्रियाओं का ऑटोमेशन। 

उद्योग पर असर

डिजिटलीकरण के फलस्वरूप लागतों में कमी आ रही है। इससे वित्तीय संस्थानों को व्यापक ग्राहकों तक पहुँचने का सामर्थ्य प्राप्त हुआ है। कुल मिलाकर, इससे व्यवसाय की टॉप लाइन और बॉटमलाइम के सुधार में मदद मिलेगी। 

ग्राहक पर असर 

तेज डिजिटलीकरण ग्राहक की प्राथमिकता से उतना ही प्रेरित है जितना कि नवाचारों और तकनीकी उन्नति से। ग्राहक अपने वित्त के प्रबंधन के लिए संघर्षरहित, तत्काल प्रक्रियाओं और परेशानीरहित तरीकों की उम्मीद कर सकते हैं।

राजीव आनंद, कार्यकारी निदेशक, ऐक्सिस बैंक 

वर्ष 2018 समाप्त होने को है। यह समय इस साल बैंकिंग उद्योग को प्रभावित करने वाले कुछ बड़े प्रभावकारी ट्रेंड्स और उद्योग एवं ग्राहक के लिए उनके निहितार्थ पर सोचने का है। यह कहना उचित होगा कि बैंकिंग उद्योग के लिए यह मंदा साल नहीं रहा है।

इस साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले आये, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआइ) के विनियम आये और उभरती तकनीकी चलन देखने को मिले। आगे इन सभी पर एक राउंडअप पेश करने की कोशिश की गयी है।

आधार सम्बन्धी फैसला 

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल सितम्बर में एक फैसले में प्राइवेट कंपनियों द्वारा आधार आधारित ई-केवाईसी और ई-साइन सेवाओं के प्रयोग को अमान्य कर दिया। किन्तु दिसम्बर में सरकार ने बैंक खाता खोलने या मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए आधार को स्वैच्छिक बनाने का संशोधन अनुमोदित कर दिया। फैसले से उद्योग में, विशेषकर विशुद्ध डिजिटल प्रस्तावों पर अपना मॉडल तैयार करने वाली कंपनियों में चिंता की लहर दौड़ गयी।

ई-केवाईसी एक परिवर्तनकारी सिद्धांत है। इसके कारण ग्राहकों को काफी सुविधा मिली और संस्थानों को भी अपनी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करने और ज्यादा कुशल बनाने में मदद मिली। इसे स्वैच्छिक बनाने के हालिया कदम का उद्योग द्वारा स्वागत किया गया है।

ग्राहक पर असर : हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आधार के प्रयोग की संवैधानिक वैधता पर मुहर लगी और आधार के विवरण साझा करने का विकल्प ग्राहकों पर छोड़ दिया गया, किन्तु कोर्ट ने इसके प्रयोग के मामले में  निजी कंपनियों और विशेषकर दूरसंचार कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के पर कुतर दिए।

इससे निःसंदेह नए ग्राहकों को जोड़ना औरर भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। उम्मीद है कि 2019 में आधार के स्वैच्छिक प्रयोग की अनुमति देने वाले रेगुलेशंस पारित हो जायेंगे। 

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फ्लोटिंग रेट वाले लोन के लिए मानदंड 





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