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Supreme Court Rejects Petition | याचिकाकर्ता- अपराध घटाने को नैतिक संगोष्ठी का आदेश दें; चीफ जस्टिस- ऐसे फिजूल आइडिया आते कहां से हैं?


  • दिल्ली में अपराध कम करने के लिए अनूठे प्रयोग अपनाने की मांग से जुड़ी याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

  • सेनानियों के नाम शहीद स्मारक की याचिका पर कहा- सरकार के समक्ष रखें मांग

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में अक्सर लोग अटपटी मांगों को लेकर जनहित याचिकाएं दायर करते हैं। मंगलवार को भी ऐसा ही एक वाकया हुआ। एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राजधानी में अपराध कम करने के लिए एक अनूठा उपाय आजमाने के लिए दिल्ली सरकार को आदेश जारी करने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई व जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने उक्त याचिका को खारिज कर दिया। 

याचिकाकर्ता का तर्क था कि नैतिकता बढ़ेगी तो अपराध कम होंगे 

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शादाब हुसैन खान ने एक जनहित याचिका दायर कर कहा कि राजधानी दिल्ली में दुष्कर्म, हत्या इत्यादि अपराधों को कम करने का बेहतरीन उपाय हैं कि दिल्ली में विभिन्न जगहों पर नैतिक संगोष्ठी आयोजित की जाए। जिसमें युवाओं व अन्य लोगों को नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाए। इससे लोगों में नैतिकता बढ़ेगी और वह अपराध नहीं करेंगे।

 

आपकी याचिका सुनवाई योग्य नहीं

इसके लिए उसकी मांग है कि कोर्ट दिल्ली सरकार को आदेश जारी करे, ताकि वह विभिन्न हिस्सों में ऐसी नैतिक संगोष्ठी नियमित रूप से आयोजित करती रहे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता की मांग पर हैरानी जाहिर की और व्यंगात्मक लहजे में कहा कि आपको जनहित याचिका दायर करने के लिए ये फिजूल के आइडिया आते कहां से हैं? इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि इसे प्रयोग के तौर पर लिया जा सकता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि आपकी याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और न ही आपकी याचिका में कोई मेरिट है। हम इसे खारिज कर रहे हैं। 

स्वतंत्रता सेनानियों के नाम शहीद स्मारक की मांग की याचिका पर कहा-यह सरकार से करें 

देश के सभी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर शहीद स्मारक बनाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह याचिका अल हिंद पार्टी नामक संस्था की ओर से दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने उक्त याचिका पर सुनवाई से इंकार करते हुए कहा कि आपकी मांग सही हो सकती है लेकिन आपने इसे जहां रखा है, वो जगह उपयुक्त नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपनी मांग को सरकार के समक्ष रखें। हम इस पर सुनवाई नहीं करेंगे।





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