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Stock market may fall in the beginning of 2019 but expected to accelerate after the general elections says analyst | 2019 की शुरुआत में गिर सकते हैं शेयर बाजार, लेकिन आम चुनाव के बाद तेजी की उम्मीद

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  • किन शेयरों में करें निवेश- इस पर  तीन जानी-मानी ब्रोकिंग फर्मों की राय
  • मजबूत स्टॉक्स में थोड़े-थोड़े निवेश की रणनीति अपनाना बेहतर, जोखिम कम रहेगा

Dainik Bhaskar

Dec 31, 2018, 10:47 AM IST

नई दिल्ली. अक्सर चुनावों से पहले शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है, और नतीजों के बाद इसमें स्थिरता आने लगती है। इस बार भी यही ट्रेंड मानें तो 2019 में मई-जून तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसलिए कम या मध्यम अवधि के लिए निवेश से बचना चाहिए। अस्थिरता में निवेशक पूरा मुनाफा गंवा सकते हैं। मौजूदा स्तर से बाजार में गिरावट आती है तो निवेशकों को अच्छे स्टॉक्स में निवेश के मौके के रूप में देखना चाहिए। लेकिन नजरिया लांग टर्म का हो। कम से कम तीन से चार साल का। निवेश थोड़ा-थोड़ा और अलग-अलग सेक्टर में करना बेहतर होगा। इससे जोखिम कम रहेगा।

कच्चा तेल सस्ता होने, रुपए में मजबूती से सकारात्मक संकेत

  1. ब्रोकिंग फर्म एपिक रिसर्च के सीईओ मुस्तफा नदीम के अनुसार चुनाव के बाद आम तौर पर बाजार में तेजी का माहौल रहता है। यानी यह लॉन्ग टर्म के निवेशकों के लिए मौका होता है। ग्लोबल मार्केट हाल के दिनों में गिरे हैं और अभी एक साल के निचले स्तर पर चल रहे हैं। सकारात्मक बात है कि कच्चा तेल हाल की ऊंचाई से 44% सस्ता हो चुका है। रुपया भी 7% मजबूत हुआ है। इससे चालू खाते का घाटा कम होगा।

  2. एक और ब्रोकिंग फर्म एसएमसी ग्लोबल के अनुसार 2019 की दूसरी छमाही में बाजार का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। 2018 में कच्चे तेल के दाम बढ़ने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में अस्थिरता रही। लेकिन अब दोनों फैक्टर भारत के पक्ष में जाते दिख रहे हैं। चुनावों के कारण ग्रामीण इलाकों में खर्च बढ़ने की उम्मीद है। बैंकों में एनपीए का स्तर भी अब घटने की उम्मीद है।

  3. इन वजहों से बाजार को समर्थन मिलेगा 


     


    • कच्चा तेल हाल की ऊंचाई से 44% सस्ता हो चुका है। 
    • डॉलर की तुलना में रुपया भी 7% मजबूत हुआ है। 
    • चुनावों के कारण ग्रामीण इलाकों में खर्च बढ़ने की उम्मीद। 
    • बैंकों में प्रोविजनिंग के बाद एनपीए घटने की उम्मीद है।

  4. 15 स्टॉक्स के दाम 2019 में 17% से 47% तक बढ़ने की उम्मीद

    मोतीलाल ओसवाल








    कंपनी लक्ष्य (रुपए)  बढ़त
    अरबिंदो फार्मा 920 27%
    ओबेराय रियल्टी 574 27%
    मैरिको 465 23%
    इन्फोसिस 800 22%
    टाइटन 1,105 20%

     


    (बढ़त शुक्रवार 28 दिसंबर को बंद भाव के आधार पर)

  5. एसएमसी ग्लोबल








    कंपनी लक्ष्य (रुपए) बढ़त
    केईसी इंटर 386 29%
    इंडियन होटल्स 183 23%
    महिंद्रा एंड महिंद्रा 963 20%
    आईटीसी 331 17%
    टोरेंट पावर 303 17%
  6. एपिक रिसर्च








    कंपनी लक्ष्य (रुपए) बढ़त
    मदरसन सुमी 240 47%
    फेडरल बैंक 121 30%
    वेदांता 250 25%
    यस बैंक 225 24%
    एसबीआई 354 20%

  7. 2018 में भारत को छोड़ सभी बड़े शेयर बाजारों में गिरावट आई












    इंडेक्स इस साल बदलाव
    सेंसेक्स (भारत) +5.93%
    डाउ जोंस (अमेरिका) -6.70%
    नैस्डैक (अमेरिका) -4.62%
    फिट्सी (लंदन) -12.41%
    डैक्स (जर्मनी) -18.26%
    सीएसी (फ्रांस) -11.93% 
    निक्केई (जापान) -12.08%
    हैंगसेंग (हांगकांग) -14.76%
    शंघाई (चीन)  -34.24%
    कोस्पी (द.कोरिया)  -17.66%

     


  8. इस साल कॉरपोरेट जगत ने पूंजी बाजार से 30% कम पैसा जुटाया

    भारतीय कंपनियों ने 2018 में इक्विटी और डेट से 5.9 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। प्राइम डाटाबेस के अनुसार यह एक साल पहले की तुलना में 30% कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव के बाद यानी 2019 की दूसरी छमाही में ही कंपनियां पैसे जुटाने के लिए ज्यादा संख्या में आगे आएंगी।


  9. आईपीओ से जुटाई रकम भी पिछले साल की तुलना में 54% कम

    सेबी ने इस साल 60,000 करोड़ के आईपीओ को मंजूरी दी। लेकिन अक्टूबर के बाद बाजार में गिरावट के कारण 24 कंपनियों ने सिर्फ 30,959 करोड़ जुटाए। 2017 में 36 कंपनियों ने 68,000 करोड़ रुपए जुटाए थे। एसएमई कंपनियों ने 2017 के 1,679 करोड़ की तुलना में इस साल 2,254 करोड़ आईपीओ से जुटाए।





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