Not Only Jet Airways These 12 Airlines Also Closed, Jet Employees Faces Cash Crunch – यह 12 एयरलाइंस भी बनी इतिहास, जेट के कर्मचारियों के लिए घर चलाना हुआ मुश्किल

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जेट एयरवेज हमेशा के लिए न सही बल्कि कुछ समय के लिए बंद हो सकती है। हालांकि भारतीय विमानन क्षेत्र में ऐसा पहली बार नहीं होने जा रहा है। इससे पहले भी 12 कंपनियों बंद हो चुकी हैं।

हालांकि जेट एयरवेज के बंद होने से करीब 20 हजार कर्मचारियों की रोजी रोटी पर सकंट पड़ने लगा है। सैलरी नहीं मिलने के कारण इन कर्मचारियों के लिए घर चलाना काफी मुश्किल हो गया है। 

दो दशक में बंद हुई 12 कंपनियां

पिछले दो दशक में भारतीय विमानन क्षेत्र में कुल 12 कंपनियां बंद हो गई हैं। इनमें विजय माल्या की किंगफिशर से लेकर के एयर सहारा तक शामिल हैं। 1987 से लेकर के 2016 तक यह कंपनियां पहले खुली और फिर बंद होती गईं।

ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादा लागत और कम मुनाफे के चलते इनका घाटा लगातार बढ़ता गया। वहीं हवाई ईंधन के लिेए भी कंपनियों को काफी पैसा खर्च करना पड़ा। 

एयर सहारा को जेट एयरवेज ने था खरीदा

एयर सहारा को जेट एयरवेज ने 2007 में खरीदा था और इसे जेट लाइट के नाम से चलाने लगा था। 1987 में सबसे पहले वायुदूत नाम की कंपनी बंद हो गई थी। इसके बाद से कंपनियों के बंद होने का सिलसिला चल पड़ा।

1996 में ईस्टवेस्ट एयरलाइंस, 1997 में दमानिया एयरवेज और एनईपी, 1996 में मोदीलुत्फ, 2000 में अर्चना एयरवेज, 2007 मे एयर डेक्कन, 2009 में एमडीएलआर, 2010 में पैरामाउंट एयरवेज, 2012 में किंगफिशर एयरलाइन और 2016 में एयर पैगासस बंद हो गई थी।  

बच्चों की फीस चुकाना भारी

जेट एयरवेज के 20 हजार कर्मचारियों को करीब चार माह से सैलरी नहीं मिली है। इस वजह से उनके लिए घर का खर्चा चलाना भी मुश्किल हो गया है। बच्चों की स्कूल फीस लेकर के लोन की ईएमआई भरने में भी दिक्कतों का सामना पेश करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ परिवार के बीमार सदस्यों का इलाज कराने के लिए इन कर्मचारियों के पास पैसे नहीं बचे हैं। 

जेट एयरवेज के पायलटों ने कंपनी को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है। जेट के पायलटों ने प्रधानमंत्री से 20,000 नौकरियां बचाने में मदद करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही जेट के पायलटों ने विमानन कंपनी को बचाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से भी मदद मांगी है। उन्होंने एसबीआई से 1,500 करोड़ रुपये का फंड जारी करने की अपील की है।

आधी सैलेरी में स्पाइसजेट दे रही नौकरी

इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक बजट एयरलाइन के लिए मशहूर स्पाइसजेस जेट पायलटों को 25-30 फीसदी कम और इंजीनियरों को 50 फीसदी तक कम वेतन में नौकरी का प्रस्ताव दे रही है। एक वरिष्ठ एयरक्राफ्ट मेंटीनेंस इंजीनियर को स्पाइसजेट ने 1.5-2 लाख रुपये प्रतिमाह सैलेरी ऑफर की, जिसे जेट चार लाख रुपये प्रतिमाह दे रहा था। माना जाता है कि जेट की औसत तनख्वाह दूसरी एयरलाइन के मुकाबले ज्यादा रहती है। उधर, स्पाइसजेट का कहना है कि वह अपने सैलरी ढांचे के हिसाब से ऑफर दे रही है।

जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने खुद को बोली से बाहर कर लिया है, क्योंकि एतिहाद और टीपीजी पार्टनर्स ने उनके रहने पर खुद को बोली से अलग करने की धमकी दी थी। 

बोर्ड की बैठक में लिया फैसला

इस संदर्भ में कंपनी के सीईओ विनय दुबे ने कर्मचारियों को एक ईमेल भी भेजा, जिसमें लिखा था कि बैंक इमरजेंसी फंडिंग पर फैसला नहीं कर सके। इसलिए मंगलवार को फिर से कंपनी के बोर्ड की मीटिंग होगी।

इसके साथ ही पायलट यूनियन के एक सदस्य ने कहा है कि अगर कंपनी को पैसे नहीं मिले, तो जेट का ऑपरेशन पूरी तरह बंद हो सकता है। इस बैठक में ही नरेश गोयल ने कंपनी को दुबारा से खरीदने का प्लान त्याग दिया। 

बता दें कि जेट एयरवेज ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को 19 अप्रैल तक रद्द कर दिया है। फिलहाल कंपनी के केवल सात विमान ही परिचालन में हैं। दुबे ने कहा कि बैंकों के साथ हुई बातचीत को बोर्ड के समक्ष मंगलवार को रखा जाएगा। कंपनी ने सार्क और आसियान देशों के अलावा टोरंटो और पेरिस की उड़ानों को भी अगले आदेश तक के लिए रद्द किया है। 

जेट एयरवेज हमेशा के लिए न सही बल्कि कुछ समय के लिए बंद हो सकती है। हालांकि भारतीय विमानन क्षेत्र में ऐसा पहली बार नहीं होने जा रहा है। इससे पहले भी 12 कंपनियों बंद हो चुकी हैं।

हालांकि जेट एयरवेज के बंद होने से करीब 20 हजार कर्मचारियों की रोजी रोटी पर सकंट पड़ने लगा है। सैलरी नहीं मिलने के कारण इन कर्मचारियों के लिए घर चलाना काफी मुश्किल हो गया है। 

दो दशक में बंद हुई 12 कंपनियां

पिछले दो दशक में भारतीय विमानन क्षेत्र में कुल 12 कंपनियां बंद हो गई हैं। इनमें विजय माल्या की किंगफिशर से लेकर के एयर सहारा तक शामिल हैं। 1987 से लेकर के 2016 तक यह कंपनियां पहले खुली और फिर बंद होती गईं।

ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादा लागत और कम मुनाफे के चलते इनका घाटा लगातार बढ़ता गया। वहीं हवाई ईंधन के लिेए भी कंपनियों को काफी पैसा खर्च करना पड़ा। 





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