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No reconsideration decision to cancel the NJAC Act | एनजेएसी एक्ट रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार नहीं


  • कोर्ट ने कहा- 470 दिन की देरी से दाखिल समीक्षा अर्जी में कोई मेरिट नहीं
  • एक्ट रद्द होने पर ही जजों की नियुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम बहाल हुआ था

Dainik Bhaskar

Dec 02, 2018, 04:11 AM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एनजेएसी एक्ट रद्द करने वाले अपने तीन साल पुराने फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया है। नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (एनजेएसी) एक्ट, 2014 में उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्तियों के लिए सरकार को ज्यादा अधिकार दिए गए थे। 16 अक्टूबर 2015 को यह एक्ट रद्द किए जाने के बाद उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों का कॉलेजियम सिस्टम बहाल हो गया था।

 

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने 27 नवंबर को यह फैसला दिया था। शनिवार को यह कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुआ। बेंच ने कहा कि समीक्षा याचिका 470 दिन की देरी से दायर की गई। देरी के लिए कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। देरी के आधार पर ही यह याचिका खारिज करने लायक है। बेंच ने कहा कि समीक्षा याचिका और इससे जुड़े दस्तावेजों में भी 


कोई मेरिट नहीं है। हम देरी के आधार पर याचिका खारिज करते हैं। वकीलों से जुड़ी एक संस्था ने अर्जी में मांग की थी कि 5 जजों की बेंच द्वारा 2015 में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।



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