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man urge narendra modi to help new zealand terror attack victim | फायरिंग में घायल हैदराबाद के युवक की मौत, परिवार ने की पुष्टि


  • फरहाज के पिता सईदुद्दीन ने कहा था- मस्जिद में जाने के बाद से बेटे का पता नहीं चला
  • भरुच के रहने वाले हाजी अली ने कहा- भाई की पत्नी को अस्पताल के अधिकारी कोई जानकारी नहीं दे रहे

क्राइस्टचर्च/अहमदाबाद. न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की अल-नूर और लिनवुड मस्जिद में शुक्रवार को हुई गोलीबारी में हैदराबाद के रहने वाले फरहाज अहसान की मौत हो गई। उसके परिवार ने न्यूज एजेंसी एएनआई से इस बात की पुष्टि की है। गोलीबारी में फरहाज बुरी तरह से घायल हुआ था, उसका न्यूजीलैंड के अस्पताल में इलाज चल रहा था। 

 

इस बीच, गोलीबारी में घायल गुजरात के भरुच के युवक के भाई ने प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद मांगी है। भरुच के हाजी अली पटेल ने न्यूज एजेंसी से कहा कि आतंकी हमले में उनके भाई को पीठ में गोली लगी थी। लेकिन, उसकी कोई खबर नहीं मिल रही है। फायरिंग की घटना में 49 लोग मारे गए और 50 जख्मी हो गए थे। 9 भारतीय मूल के लोगों के लापता होने की भी खबर है।

भाई और उसकी पत्नी एकसाथ मस्जिद गए थे- हाजी अली

  1. हाजी अली ने कहा- मेरा भाई और उसकी पत्नी एक साथ मस्जिद में गए थे। मेरे भाई को पीठ में गोली लगी थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उसकी पत्नी भी बाद में अस्पताल गई थी, लेकिन उसे मेरे भाई से मिलने नहीं दिया गया।

  2. “मेरा भाई और उसकी पत्नी आपस में संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। वहां के अधिकारी उसके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं दे रहे हैं। मेरा भाई गंभीर स्थिति में है। मैं केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री मोदी, सुषमा स्वराज और गुजरात के मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि उन दोनों को मिलाने में मदद करें।’


  3. घायलों में एक हैदराबाद का भी युवक

    हैदराबाद के खुर्शीद इकबाल ने बताया- मेरे भाई अहमद जहांगीर भी न्यूजीलैंड की अल नूर मस्जिद में शुक्रवार को गए थे। एक वीडियो मिला है, जिसमें वह नजर आ रहे हैं। उसके सीने में गोली लगी है और वह स्ट्रेचर पर लेटे हैं। 


  4. प्रधानमंत्री मोदी ने की थी न्यूजीलैंड आतंकी हमले की निंदा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले में मारे गए निर्दोष लोगों के प्रति दुख और संवेदनाएं व्यक्त की थीं। मोदी ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि भारत सभी प्रकार के आतंक और इस तरह की घटनाओं का समर्थन करने वालों की निंदा करता है। इस प्रकार की घृणा और हिंसा की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।





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