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Justice Sikri withdraws consent to govt offer to nominate him to Commonwealth Tribunal | जस्टिस सीकरी ने कॉमनवेल्थ ट्रिब्यूनल में नियुक्ति के सरकार के प्रस्ताव को ठुकराया

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  • मोदी सरकार ने दिसंबर में जस्टिस सीकरी को लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सेक्रेटरिएट आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल में भेजे जाने का प्रस्ताव रखा था
  • सीकरी ने पहले प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, रविवार को उन्होंने इससे नाम वापस ले लिया
  • जस्टिस सीकरी, आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ पद से हटाने वाली 3 सदस्यीय समिति में शामिल थे, मोदी इस समिति के अध्यक्ष थे

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 10:00 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी ने रविवार को सरकार की ओर से लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सेक्रेटरिएट आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल (सीएसएटी) में भेजे जाने के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जस्टिस सीकरी को ट्रिब्यूनल को अध्यक्ष या सदस्य बनाने का प्रस्ताव था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सीकरी इसी साल 6 मार्च को रिटायर होने वाले हैं और पद पर उनकी नियुक्ति के लिए कानून मंत्रालय में प्रक्रिया भी चल रही थी। उधर, कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार से मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है। 

पिछले महीने सरकार ने जस्टिस सीकरी से संपर्क किया था

  1. सूत्रों के मुताबिक- पिछले महीने सरकार ने जस्टिस सीकरी से ट्रिब्यूनल में पद दिए जाने को लेकर संपर्क किया था। इस पर सीकरी ने सहमति भी जताई थी। इसके लिए उन्हें साल में केवल दो या तीन सुनवाई करनी होतीं।  इसके लिए उन्हें कोई वेतन भी नहीं मिलता। 

  2. जस्टिस सीकरी सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के बाद सबसे वरिष्ठ जज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली जिस समिति ने आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ पद से हटाया था, जस्टिस सीकरी उसमें शामिल थे। उन्होंने वर्मा को हटाए जाने का समर्थन किया था। जबकि समिति में तीसरे सदस्य कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इसके विरोध में थे।

  3. इससे पहले सरकारी सूत्रों की ओर से यह कहा जा रहा था कि जस्टिस एके सीकरी को लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सीक्रेट्रियाट आर्बिट्रल ट्राइब्यूनल के सदस्य के लिए मनोनीत किया गया है। हालांकि इस पर विवाद छिड़ गया था और कांग्रेस ने सीबीआई डायरेक्टर को हटाए जाने पर उनकी सहमति से इसे जोड़ा था और सरकार से जवाब मांगा था। वर्मा को 2:1 के वोट से हटा दिया गया था।

  4. सूत्रों के मुताबिक- विदेश मंत्रालय ने भारत की तरफ से नियुक्ति के लिए ट्रिब्यूनल में बात भी की थी। हालांकि अब इस मामले में विदेश या कानून मंत्रालय की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।







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