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George Fernandes last rites to be held hindu rituals today | जॉर्ज फर्नांडिस ईसाई थे, फिर भी हिंदू रीति-रिवाज से होगा अंतिम संस्कार, ये है खास वजह


नेशनल डेस्क, नई दिल्ली. पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार को 88 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे वक्त से अल्जाइमर्स से पीड़ित थे। फर्नांडीस 1967 में दक्षिण बॉम्बे से कांग्रेस के एसके पाटिल को हराकर पहली बार सांसद बने। 1975 की इमरजेंसी के बाद फर्नांडीस बिहार की मुजफ्फरपुर सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार (1998-2004) में फर्नांडीस को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। कारगिल युद्ध के दौरान वह ही रक्षा मंत्री के पद पर काबिज थे। जॉर्ज फर्नांडिस ईसाई थे, लेकिन उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया जाएगा। ऐसा करने के पीछे खास वजह है।

– जॉर्ज फर्नांडिस की करीबी रहीं जया जेटली की मानें तो फर्नांडिस ने मंशा जाहिर की थी कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति- रिवाज से हो। इसलिए उनके दाह संस्कार के बाद अस्थियों और राख को दफनाया जाएगा। इस तरह उनकी अंतिम इच्छा अनुसार हिंदू व ईसाई धर्म दोनों की परंपरा से अंतिम सरकार किया जाएगा।

1967 में पहली बार सांसद बने : 3 जून 1930 को जन्मे जॉर्ज भारतीय ट्रेड यूनियन के नेता थे। वे पत्रकार भी रहे। वह मूलत: मैंगलोर (कर्नाटक) के रहने वाले थे। 1946 में परिवार ने उन्हें पादरी का प्रशिक्षण लेने के लिए बेंगलुरु भेजा। 1949 में वह बॉम्बे आ गए और ट्रेड यूनियन मूवमेंट से जुड़ गए। 1950 से 60 के बीच उन्होंने बॉम्बे में कई हड़तालों की अगुआई की।

9 लोकसभा चुनाव जीते : 1967 से 2004 तक 9 लोकसभा चुनाव जीते। 2003 में विपक्ष ने कैग का हवाला देते हुए जॉर्ज पर ताबूत घोटाले के आरोप लगाए। जॉर्ज ने चुनौती देते हुए कहा, ‘अगर आप (विपक्ष) ईमानदार हैं, तो कल तक मुझे सबूत लाकर दें। मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं।’ अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने फर्नांडीस को कारगिल ताबूत घोटाले में पूरी तरह निर्दोष करार दिया।





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