Friederike Irina Bruning, will not give back the honour | जर्मनी की ब्रूनिंग का पद्म सम्मान लौटाने से इनकार, कहा- बस गौ सेवा करना चाहती हूं

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  • 25 जून को ब्रूनिंग की वीजा अवधि खत्म हो रही है, इसे नहीं बढ़ाने पर दी थी पद्म सम्मान लौटाने की चेतावनी
  • विदेश मंत्रालय ने अवधि बढ़ाने से इनकार किया था, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रिपोर्ट मांगी है

मथुरा. जर्मन नागरिक फ्रेडरिके इरीना ब्रूनिंग ने सोमवार को कहा कि वे पद्म सम्मान नहीं लौटाएंगी। वे बस गौ सेवा करना चाहती हैं। दरअसल, ब्रूनिंग बीते दो दशकों से मथुरा में गौ सेवा कर रही हैं। 61 वर्षीय ब्रूनिंग को स्थानीय लोग सुदेवी माताजी के नाम से जानते हैं। 25 जून को उनके वीजा की अवधि समाप्त हो रही है। इसे बढ़ाने से विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने इनकार कर दिया था। इस पर ब्रूनिंग ने पद्म सम्मान लौटाने की बात कही थी। 

 

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को इस मामले पर रिपोर्ट मांगी। ब्रूनिंग ने कहा कि यदि मुझे गौ सेवा ही नहीं करने दी जाएगी तो फिर मेरे लिए यह सम्मान मायने नहीं रखता है। मेरे लिए पहले गौ सेवा है। बाद में सारी बातें हैं। उन्होंने कहा कि भारत में गाय को पशु से बढ़कर माना जाता है। मैं इसके धार्मिक महत्व से परिचित हूं। यही बात मैंने अधिकारियों को भी समझाने की कोशिश की थी।

 

ब्रूनिंग को इसी साल लावारिस गायों की सेवा करने के लिए पद्म सम्मान से नवाजा गया था। ब्रूनिंग ने कहा- पद्मश्री मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ है। मुझे यह प्यार और सम्मान के साथ मिला है। मैं इसे नहीं लौटाऊंगी। ब्रूनिंग ने कहा इन गायों की हालत बेहतर नहीं है। मैं इन्हें इस हाल में छोड़कर अपने देश कैसे लौट जाऊं? यदि मुझे जाना पड़ा तो मैं चली भी जाऊंगी मगर इन गायों का क्या होगा?

 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रूनिंग ने कहा कि हर दिन 20-25 घायल गायों के मामले हमारे पास आते हैं। मैं इनसे पैसे नहीं कमाती हूं। मैं केवल सेवा करती हूं।



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