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food delivery companies lose 1371 crores in 2 years still taking 55 million monthly order | फूड डिलिवरी कंपनियों को 2 साल में 1371 करोड़ का घाटा, फिर भी हर महीने 5.5 करोड़ ऑर्डर ले रहीं


  • 2021 तक ऐप बेस्ड फूड डिलिवरी बिजनेस 4 गुना बढ़कर 17 हजार करोड़ रु का होने की उम्मीद
  • स्विगी और जोमैटो ने पिछले एक साल में 14 हजार करोड़ रुपए का निवेश हासिल किया

नई दिल्ली. ऐप के जरिए ऑर्डर लेकर खाने की डिलिवरी भारत में सबसे तेजी से बढ़ते व्यवसाय में एक है। स्विगी, जोमैटो, उबर ईट्स और फूड पांडा जैसी कंपनियां ज्यादा से ज्यादा ग्राहक जोड़ने के लिए कई तरह के डिस्काउंट दे रही हैं। इससे उन्हें करोड़ों रुपए का घाटा भी हो रहा है।

स्विगी को 2 साल में सबसे ज्यादा 602 करोड़ का घाटा

  1. मार्च 2018 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में इन कंपनियों को कुल मिलाकर 731 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। उससे पिछले वित्त वर्ष, 2016-17 में भी इन्हें 640 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। यानी दो साल में इन कंपनियों ने कुल 1,371 करोड़ रुपए का घाटा उठाया है।

  2. स्विगी को 2 साल में सबसे ज्यादा 602 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। इसके बाद जोमैटो का नंबर है। ये दोनों भारत में अभी फूड डिलिवरी की दो सबसे बड़ी कंपनियां हैं। स्विगी भारत में इस सेक्टर की इकलौती यूनिकॉर्न (100 करोड़ डॉलर से ज्यादा वैल्यूएशन) कंपनी है।

  3. किसे कितना घाटा हुआ ?






    कंपनी 2016-17 में घाटा (रु) 2017-18 में घाटा (रु)
    स्विगी 205 करोड़ 397 करोड़
    जोमैटो 390 करोड़ 106 करोड़
    फूड पांडा 45 करोड़ 228 करोड़

  4. ग्राहक बढ़ाने के लिए कंपनियां घाटा झेल रहीं

    फूड डिलिवरी कंपनियां इसलिए घाटा झेल रही हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक इनसे जुड़ें और इनके ऐप लोगों की दिनचर्या में शामिल हो जाएं। अभी भारत में हर महीने फूड डिलिवरी ऐप के जरिए 5.5 करोड़ ऑर्डर दिए जा रहे हैं।

  5. विशेषज्ञों के मुताबिक 2021 तक भारत में ऐप के जरिए फूड डिलिवरी बिजनेस चार गुना बढ़कर 2.5 अरब डॉलर (करीब 17.7 हजार करोड़ रुपए) का हो जाएगा।

  6. देश में स्मार्टफोन की पैठ बढ़ने के साथ ही फूड डिलिवरी बिजनेस को भी तेज रफ्तार मिल रही है। इसी उम्मीद में निवेशक भी इस बिजनेस में जमकर पैसा लगा रहे हैं।

  7. स्विगी और जोमैटो ने पिछले एक साल में 14 हजार करोड़ रुपए का निवेश हासिल किया है। इसमें आधे से ज्यादा निवेश स्विगी को मिला है। ओला की स्वामित्व वाली कंपनी फूड पांडा अपने ऑपरेशन को तेज करने के लिए करीब 1.4 हजार करोड़ का निवेश लाने वाली है।

  8. अब ये कंपनियां नकदी पर भी ध्यान दे रही हैं। जोमैटो ने इसके लिए प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन चलाने के साथ नवंबर 2017 में जोमैटो गोल्ड नाम की सब्सक्रिप्शन सर्विस भी पेश की है। इसी तरह स्विगी ने भी जुलाई, 2018 में स्विगी सुपर नाम की सब्सक्रिप्शन सर्विस पेश की थी।


  9. स्विगी और जोमैटो को मिलते हैं 81% ऑर्डर

    भारत में अब हर महीने ऐप के जरिए 5.5 करोड़ फूड ऑर्डर किए जाते हैं। इनमें 2.5 करोड़ स्विगी और 2 करोड़ जोमैटो पर आते हैं। कुल ऑर्डर में इनका हिस्सा 81% है। बाकी ऑर्डर उबर ईट्स और फूड पांडा को मिल रहे हैं।


  10. कंपीटीशन की वजह से कई प्रोडक्ट पर 50% तक डिस्काउंट

    लगातार बढ़ते खर्च के बावजूद प्रतिस्पर्धा के कारण डिस्काउंट पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। जोमैटो, उबर ईट्स और फूड पांडा अब भी कई प्रोडक्ट पर 50% तक का डिस्काउंट दे रही हैं।

  11. जहां तक खर्च का सवाल है तो स्विगी इस मामले में भी सबसे आगे है। मार्च 2018 में खत्म वित्तीय वर्ष में कंपनी ने 865 करोड़ खर्च किए। इसके बाद जोमैटो और फूड पांडा हैं।

  12. पिछले दो साल में रेवेन्यू






    कंपनी 2016-17 में रेवेन्यू (रु) 2017-18 में रेवेन्यू (रु)
    जोमैटो 332 करोड़ 466 करोड़
    फूड पांडा 45 करोड़ 89 करोड़
    स्विगी 133 करोड़ 442 करोड़





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