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farmer Won the case of land | बिना जमीन अधिग्रहण 1951 में बना हाईवे, 18 साल लड़ा केस; अब कोर्ट से जीता किसान सड़क उखाड़ेगा


  • पहले कच्ची सड़क थी, फिर नेशनल हाईवे, अब पीडब्ल्यूडी के पास
  • किसान बोला, सरकार ने 70 साल इस्तेमाल किया, अब मुआवजे के लिए भी लड़ेंगे

     

Dainik Bhaskar

Dec 02, 2018, 03:46 AM IST

धर्मेश पांडेय (यमुनानगर). 1951 में बने अम्बाला-जगाधरी रोड (पुराना नेशनल हाईवे-73) के लिए कब्जाई जमीन छुड़ाने के लिए दो पीढ़ियों को लड़ना पड़ा। अब 68 साल बाद कोर्ट में केस जीता तो जमीन वापस मिलेगी। इसलिए यह रोड कैल से जगाधरी के बीच कभी भी बंद हो सकता है। रोड हरीपुर जट्टान मोड़ से कचरा प्लांट तक करीब 9 बीघे में किसान की जमीन पर बनी है। 


किसान कोर्ट से केस जीत चुका है और कोर्ट उसे कब्जा लेने के आदेश दे चुका है। किसान कश्मीरी सिंह ढिल्लों ने कहा है कि सोमवार या मंगलवार को वे सड़क को उखड़वा देंगे। अर्थ मूविंग मशीन तैयार खड़ी है। वहीं, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि सड़क के पास ही करीब 100 फीट चौड़ी सरकारी जमीन है। उस पर अगले कुछ दिनों में नई रोड बना दी जाएगी। तब तक दादूपुर-नलवी नहर के साथ-साथ बने रोड से ट्रैफिक निकालने की कोशिश होगी। यह रोड जगाधरी-यमुनानगर को नए बाइपास से जोड़ता है।

 

जमीन मालिक का कहना है कि हमारे परिवार के पास काफी जमीन है। पहले जमीन पर जंगल था। जमीन के बीच से कच्चा रास्ता था। साल 1951 में कच्चे रास्ते पर रोड बना दिया गया। तब यह रोड पीडब्ल्यूडी के अंडर था। ट्रैफिक ज्यादा हुआ तो नेशनल हाईवे घोषित कर दिया। संयुक्त पंजाब के समय में पिता व चाचा सरकार व विभाग को पत्र लिखते रहे कि यह सड़क हमारी जमीन पर बनी है। 50 साल में जाने कितनी चिट्ठियां लिखी। पर किसी ने बात नहीं सुनी।

 

आखिरकार चाचा बलबीर साल 2000 में कोर्ट चले गए। 2016 में सेशन कोर्ट ने हमारे हक में फैसला सुनाया। फैसले के खिलाफ सरकार ने रिव्यू पिटिशन डाली, लेकिन कोर्ट ने फैसला नहीं बदला। अफसरों ने जमीन के बदले दूसरी जमीन देने का अॉफर भी दिया। हम इसके लिए तैयार नहीं हैं।

 

फैसला लागू कराने के लिए न्यायाधीश सुनील कुमार के कोर्ट में 2 साल सुनवाई चली। अक्टूबर में कोर्ट ने 16 नवंबर तक रोड पर कब्जा देने के आदेश दिए। सरकार ने अभी कब्जा नहीं दिया। अब हम कब्जा लेंगे। सरकार ने करीब 70 साल हमारी जमीन का इस्तेमाल किया है, उसके मुआवजे के लिए भी लड़ेंगे।



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