Exports Up 11% In March, Biggest Increase Since October 2018 – मार्च में निर्यात ने तोड़ा रिकॉर्ड, अक्टूबर 2018 से अब तक सबसे बड़ी वृद्धि

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प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

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देश के निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गयी है। निर्यात मार्च में 11 प्रतिशत बढ़कर 32.55 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह अक्टूबर, 2018 से निर्यात में सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है। उस समय निर्यात 17.86 प्रतिशत बढ़ा था। फार्मा, रसायन और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में ऊंची वृद्धि की वजह से कुल निर्यात बढ़ा है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पूरे वित्त वर्ष 2018-19 में निर्यात नौ प्रतिशत बढ़कर 331 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। मार्च, 2018 में निर्यात का आंकड़ा 29.32 अरब डॉलर रहा था।

आलोच्य महीने में आयात भी 1.44 प्रतिशत बढ़कर 43.44 अरब डॉलर रहा। हालांकि, इस दौरान व्यापार घाटा कम होकर 10.89 अरब डॉलर पर आ गया, जो मार्च, 2018 में 13.51 अरब डॉलर था। सोने का आयात मार्च में 31.22 प्रतिशत बढ़कर 3.27 अरब डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल का आयात 5.55 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11.75 अरब डॉलर रहा। पूरे वित्त वर्ष 2018-19 में आयात 8.99 प्रतिशत बढ़कर 507.44 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष के दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 176.42 अरब डॉलर रहा, जो 2017-18 में 162 अरब डॉलर था। 

वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान निर्यात में लगभग एक जैसी वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में निर्यात का आंकड़ा 331.02 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। यह किसी वित्त वर्ष में निर्यात का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इससे पहले 2013-14 में निर्यात 314.4 अरब डॉलर रहा था। वित्त वर्ष के दौरान जिन क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई उनमें पेट्रोलियम 28 प्रतिशत, प्लास्टिक 25.6 प्रतिशत, प्लास्टिक 25.6 प्रतिशत, रसायन 22 प्रतिशत, फार्मास्युटिकल्स 11 प्रतिशत और इंजीनियरिंग 6.36 प्रतिशत शामिल हैं। 

आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-मार्च, 2018-19 में कच्चे तेल का आयात 29.27 प्रतिशत बढ़कर 140.47 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं गैर तेल आयात 2.82 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 366.97 अरब डॉलर रहा। भारतीय व्यापार संवर्द्धन परिषद (टीपीसीआई) के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यात का प्रदर्शन अब तक का सबसे अच्छा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें खाद्य जिंस जैसे नए उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिससे वृद्धि अधिक टिकाऊ हो सके। निर्यातकों के प्रमुख संगठन फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि संरक्षणवाद, कठिन वैश्विक स्थिति और घरेलू मोर्चे पर अड़चनों के बावजूद निर्यात बढ़ा है। 

गुप्ता ने कहा कि निर्यातकों को ऋण के प्रवाह, शोध एवं विकास के लिए ऊंची कर कटौती, जीएसटी से पूरी तरह छूट, विदेशी पर्यटकों को बिक्री पर लाभ जैसे समर्थन तत्काल उपलब्ध कराने की जरूरत है। मंत्रालय ने कहा कि 2016-17 से कुल निर्यात (वस्तुओं और सेवाओं का मिलाकर) लगातार बढ़ रहा है। 2018-19 में यह पहली बार 500 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 2018-19 में 7.97 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 535.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। हालांकि, आंकड़ों के अनुसार फरवरी, 2019 में सेवा निर्यात 6.54 प्रतिशत घटकर 16.58 अरब डॉलर रह गया। इस दौरान सेवाओं का आयात भी 11 प्रतिशत घटकर 9.81 अरब डॉलर पर आ गया। 

 

देश के निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गयी है। निर्यात मार्च में 11 प्रतिशत बढ़कर 32.55 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह अक्टूबर, 2018 से निर्यात में सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है। उस समय निर्यात 17.86 प्रतिशत बढ़ा था। फार्मा, रसायन और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में ऊंची वृद्धि की वजह से कुल निर्यात बढ़ा है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पूरे वित्त वर्ष 2018-19 में निर्यात नौ प्रतिशत बढ़कर 331 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। मार्च, 2018 में निर्यात का आंकड़ा 29.32 अरब डॉलर रहा था।

आलोच्य महीने में आयात भी 1.44 प्रतिशत बढ़कर 43.44 अरब डॉलर रहा। हालांकि, इस दौरान व्यापार घाटा कम होकर 10.89 अरब डॉलर पर आ गया, जो मार्च, 2018 में 13.51 अरब डॉलर था। सोने का आयात मार्च में 31.22 प्रतिशत बढ़कर 3.27 अरब डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल का आयात 5.55 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11.75 अरब डॉलर रहा। पूरे वित्त वर्ष 2018-19 में आयात 8.99 प्रतिशत बढ़कर 507.44 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष के दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 176.42 अरब डॉलर रहा, जो 2017-18 में 162 अरब डॉलर था। 

वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान निर्यात में लगभग एक जैसी वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में निर्यात का आंकड़ा 331.02 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। यह किसी वित्त वर्ष में निर्यात का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इससे पहले 2013-14 में निर्यात 314.4 अरब डॉलर रहा था। वित्त वर्ष के दौरान जिन क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई उनमें पेट्रोलियम 28 प्रतिशत, प्लास्टिक 25.6 प्रतिशत, प्लास्टिक 25.6 प्रतिशत, रसायन 22 प्रतिशत, फार्मास्युटिकल्स 11 प्रतिशत और इंजीनियरिंग 6.36 प्रतिशत शामिल हैं। 

आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-मार्च, 2018-19 में कच्चे तेल का आयात 29.27 प्रतिशत बढ़कर 140.47 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं गैर तेल आयात 2.82 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 366.97 अरब डॉलर रहा। भारतीय व्यापार संवर्द्धन परिषद (टीपीसीआई) के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यात का प्रदर्शन अब तक का सबसे अच्छा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें खाद्य जिंस जैसे नए उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिससे वृद्धि अधिक टिकाऊ हो सके। निर्यातकों के प्रमुख संगठन फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि संरक्षणवाद, कठिन वैश्विक स्थिति और घरेलू मोर्चे पर अड़चनों के बावजूद निर्यात बढ़ा है। 

गुप्ता ने कहा कि निर्यातकों को ऋण के प्रवाह, शोध एवं विकास के लिए ऊंची कर कटौती, जीएसटी से पूरी तरह छूट, विदेशी पर्यटकों को बिक्री पर लाभ जैसे समर्थन तत्काल उपलब्ध कराने की जरूरत है। मंत्रालय ने कहा कि 2016-17 से कुल निर्यात (वस्तुओं और सेवाओं का मिलाकर) लगातार बढ़ रहा है। 2018-19 में यह पहली बार 500 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 2018-19 में 7.97 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 535.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। हालांकि, आंकड़ों के अनुसार फरवरी, 2019 में सेवा निर्यात 6.54 प्रतिशत घटकर 16.58 अरब डॉलर रह गया। इस दौरान सेवाओं का आयात भी 11 प्रतिशत घटकर 9.81 अरब डॉलर पर आ गया। 

 





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