Election News In Hindi : rise of bjp like phoenix lok sabha election narendra modi | फ़ीनिक्स की तरह अपनी ही राख से फिर जन्म लेती भाजपा

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नवनीत गुर्जर. कहा जा सकता है कि जीरो से दो, दो से 80 और अब लगातार दूसरी बार अकेले के दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त करना भाजपा के लिए फ़ीनिक्स की तरह खुद की ही राख में से फिर जन्म लेने जैसा है। यहां फ़ीनिक्स को समझने के लिए इतिहास में जाना होगा। 

 

इतिहास बताता है फ़ीनिक्स (ककनूस) से अपने आप को पहचानने वाली नस्ल ने अपना नाम फीनिशियन रखा था। ककनूस बार-बार अपनी ही राख में से जन्म लेता है। मनुष्यों की जिस नस्ल ने विनाश में से गुज़र सकने की अपनी शक्ति को पहचाना, अपना नाम जल मरने वाले और अपनी ही राख में से फिर पैदा होने वाले ककनूस से जोड़ लिया। यह फ़ीनिक्स सूरज की पूजा से संबंधित है। सूरज जो रोज डूबता है और रोज चढ़ता है, और ये फीनिशियंस, जिनका उद्गम स्थल आज तक इतिहास को ज्ञात नहीं, यद्यपि इनके संबंध समर और हिंदुस्तान से पाए जाते हैं। ये सदा सूरज की पूजा करते थे। ओन सूरज का एक नाम था, इसीलिए फीनिशियंस ने जब यूरोप में नई धरती की खोज की, उसका नाम एल-ओन-डोन रखा, जो आज लंदन है।

 

इजरायल के जब बारहों कबीले बिखर गए थे, प्रतीत होता है कि उनमें से भी कुछ लोग फीनिशियंस से जा मिले थे, क्योंकि शब्द ‘इंग्लैंड’ की जड़ें हिब्रू भाषा में है। जोजफ कबीले का चिह्न बैल होता था। बैल के लिए हिब्रू भाषा में एंगल शब्द है। नई खोजी हुई धरती को उन लोगों ने एंगल-लैंड नाम दिया, जो आज इंग्लैंड है।

 

इन खयालों का इतिहास से केवल इतना संबंध है कि उस नस्ल फ़ीनिक्स से भाजपा का संबंध जोड़ना मुझे बड़ा पहचाना हुआ लगता है। फीनिशियंस नस्ल को हम अपनी भाषा में ककनूसी नस्ल कह सकते हैं। 

 

दरअसल ककनूस एक कल्पित पक्षी का नाम है जो बड़ा, लंबी चोंच वाला होता है। इसकी चोंच में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। कहते हैं ककनूस पक्षी चील के समान लम्बा-चौड़ा होता है। इसके पंख चमकीले, किरमिची और सुनहरे होते हैं। इसके स्वर में संगीत होता है, और यह सदा एक ही, अकेला होता है। इसकी आयु कम से कम पांच सौ बरस होती है। कुछ इतिहासकार इसकी आयु एक हजार चार सौ बरस बताते हैं। इसकी आयु का अनुमान सत्तानवे हजार दो सौ वर्ष भी है। इसकी आयु जब शेष होने लगती है, यह सुगंधित वृक्षों की टहनियां इकट्ठा करके एक घोंसला बनाता है और उसमें बैठकर गाता है। तब इसकी चोंच के छिद्रों से चिंगारियां निकलती हैं। यही चिंगारियां वहां इकट्ठा लकड़ियों से मिलकर आग बन जाती हैं और यह घोंसले सहित उसमें जल जाता है। इसकी राख में से एक नया ककनूस जन्म लेता है। जो सारी सुगंधित राख को समेटकर सूरज के मंदिर की ओर जाता है, और वह राख सूरज के सामने चढ़ा देता है। 

 

कुछ इतिहासकार इसकी मृत्यु का वर्णन इस प्रकार करते हैं कि जब इसे जीवन के अंतिम समय के आने का आभास हो जाता है, यह स्वयं उड़कर सूरज के मंदिर में पहुंच जाता है और पूजा की आग में बैठ जाता है। यह जब आग में बिल्कुल राख हो जाता है, तो इसकी राख में से नया ककनूस जन्म लेता है। मिस्र के पुरातन इतिहास में इस पक्षी का घर उधर बताया जाता है, जिधर सूरज उदय होता है। इसलिए इतिहासकार इस पक्षी का मूल स्थान अरब या हिंदुस्तान मानते हैं। हिंदुस्तान का अधिक, क्योंकि सुगंधित वृक्षों की टहनियां हिंदुस्तान की भूमि के साथ जुड़ती हैं।

 

लैटिन के एक कवि ने ककनूस को रोमन राज्य से जोड़ा है। कुछ पादरियों ने इसे क्राइस्ट की मृत्यु और उनके पुनर्जीवित होने की कहानी से जोड़ा है और कुछ लोग इसे क्वारी मां की कोख से जन्मे क्राइस्ट के जन्म से जोड़ते हैं, पर हम इसे सच्चे, संघर्षशील व्यक्ति या संगठन से जोड़ सकते हैं, चाहे वह किसी जाति, धर्म या देश का हो!

 

कुछ लोग कहते हैं यह पक्षी जब अपने पूरे यौवन पर होता है, खुद ही लकड़ियां इकट्ठा करता है और इन लकड़ियों के ढेर पर बैठकर सुंदर स्वर लहरियां छेड़ता है। उसकी चोंच के छिद्रों से चिन्गारियां फूटती हैं। इन चिन्गारियों से लकड़ियां, जिन पर वह बैठा होता है, आग पकड़ लेती हैं और यह ककनूस वहीं जलकर राख हो जाता है। फिर जब पावस की पहली बूंद इस राख के ढेर पर पड़ती है तो अपनी ही राख में से एक नया ककनूस जन्मता है।

 

भाजपा का उद्गम और विस्तार भी कुछ ऐसा ही है। कहा जा सकता है कि भाजपा भी ककनूसी नस्ल की है। सबसे पहले अटल जी ने इसे जीया। फिर आडवाणी।… और अब नरेंद्र मोदी। कहा जा सकता है कि तीन पुनर्जन्म हो चुके हैं। इस जन्म में शायद लंबी उम्र लिखी है। संघर्ष के दो कार्यकाल सामने हैं और तीसरा इंतज़ार में। 

 

किसी ने नहीं सोचा था कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर खेत की मिट्टी में रची-बसी कांग्रेस का इतनी जल्दी, ऐसा पराभव देखने को मिलेगा! भाजपा के लंबे संघर्ष और उसकी टीम ने कांग्रेस को बहुत जल्दी सिमटने को विवश कर दिया। जिस देशव्यापी पार्टी का अध्यक्ष ही एक सीट से हार जाए, उसकी लोकप्रियता या नकारात्मक लोकप्रियता का अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है।





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