Election News In Hindi : no situation like 2013 in UP, alliance between Muslims and Jats is visible | उत्तरप्रदेश में 2013 जैसे हालात नहीं, मुस्लिमों और जाटों में गठजोड़ दिख रहा

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मार्क टली

मार्क टली

Apr 10, 2019, 09:18 AM IST

लोकसभा चुनाव की 11 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के साथ ही औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। पहले चरण में पश्चिमी उत्तरप्रदेश की जिन सीटों पर मतदान होना है, उनमें मुजफ्फरनगर सीट भी शामिल है। इस सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा को सपा-बसपा-रालोद के मजबूत गठबंधन का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस के खड़े नहीं होने से गठबंधन के वोट भी नहीं बंटेंगे। अखिलेश यादव की सपा, मायावती की बसपा और अजित सिंह की रालोद का यहां पर गठबंधन है। चौधरी चरण सिंह के पुत्र अजित सिंह की जाटोें पर अच्छी पकड़ है और वे खुद यहां से प्रत्याशी हैं। पिछली बार 2013 के दंगों ने जाटों और मुसलमानों को बांट दिया था। इस बार जो मैंने मुजफ्फरनगर में देखा उससे ये दोनों साथ दिखते हैं।

 

खेतों में खड़े गन्ने, पकी गेहूं और आमों पर खिले बौर के बीच से गुजरते हुए मैंने देखा कि किसानों ने खेती योग्य हर इंच जमीन पर फसल लगाई हुई है। इसके बावजूद मैंने किसान को गुस्से में पाया। शैजुद्दी गांव में जाट किसानों का साफ कहना था कि वे इस बार भाजपा प्रत्याशी को वोट नहीं देंगे। हुक्के के चारों ओर बैठे इन किसानों के पास उनकी शिकायतों की पूरी सूची थी। पहले स्थान पर चीनी मिलों पर किसानों के गन्ने का बकाया दिलाने में सरकार की विफलता थी। उनका कहना था कि अब लावारिस पशुओं की वजह से वे सिर्फ गन्ना ही उगा रहे हैं, यही फसल है जिसे वे नहीं खा पाते। गोवध पर रोक से लावारिस जानवर समस्या बन गए हैं। खाद की कीमतों को लेकर भी शिकायत थी। एक किसान का कहना था कि मोदी किसानों को खत्म कर देना चाहते हैं।


परबालियान गांव में एक मुस्लिम किसान इस्लामुद्दीन ने मुझसे कहा कि जाटों व मुस्लिमों का गठबंधन इस बार अटूट है। 2013 में गांव में हिंसा हुई थी, लेकिन अब शांति है। हमने उकसावे में आकर जाटों से लड़ने की कीमत जान ली है। एक अन्य प्रमुख मुस्लिम नेता ने कहा कि हम इस बार किसी उकसावे नहीं आएंगे। भाजपा हमारी भावनाओं से खेल रही है, लेकिन हम कोई प्रतिक्रिया नहीं करेंगे।


जब मैं भाजपा के विधानसभा अध्यक्ष सुधीर सैनी से मिला तो उन्हांेने स्वीकार किया इस बार पिछले चुनाव जैसा उत्साह नहीं है, जब मोदी ने वोटरों में उम्मीद जगाई थी। वह उम्मीद पूरी हो चुकी है और मोदी को अब अपनी उपलब्धियों के निर्माण के लिए और समय चाहिए। मैंने पूछा इसका मतलब इस बार कोई मोदी लहर नहीं है। उनका उत्तर था, बिल्कुल नहीं। हां सुरक्षा और विकास का उनका अभियान असर कर रहा है। जब मैंने सैनी से मुस्लिम और जाटों के बीच गठजोड़ के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि भाजपा के मौजूदा सांसद व प्रत्याशी संजीव बालियान खुद जाट हैं। उन्होंने कहा कि बालियान को जाट वोट भी मिलेंगे और 10 फीसदी मुस्लिम वोट भी।


जाटों, मुस्लिमों और दलितों के गठजोड़ का सामना कर रही भाजपा काे ऊंची जातियों के साथ ही कुछ ओबीसी, गुर्जर और गैर-जाटव दलित वोटों पर भरोसा है। हालांकि इससे जीत का गणित तो नहीं बनता। 

             

फिर मोदी के राष्ट्रवाद और विपक्षी दलों खासकर राहुल गांधी और कांग्रेस को राष्ट्रविरोधी बताने के अभियान का क्या होगा? भाजपा को भरोसा है कि यह हिन्दू राष्ट्रवाद एक बार फिर वैसी मोदी लहर पैदा करेगा, जिसने 2014 में जाति के मेरे गणित को गलत साबित कर दिया था। गठबंधन के प्रत्याशी अजित सिंह काे ऐसा कोई डर नहीं है। वह कहते हैं कि पिछली बार मोदी सपने बेच रहे थे और इस बार उनके पास बताने के लिए सिर्फ राष्ट्रवाद है। 


लेकिन जिन नाराज जाट किसानों से मैं मिला, उन्होंने स्वीकार किया कि उनके बेटे और पोते जो 19-20 साल के हैं मोदी से प्रभावित हैं। हमें यह जानने के लिए कि क्या जातियों ने अपनी परंपरागत जगह पा ली है या राष्ट्रवाद और मजबूत हुआ है, कई हफ्ते इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन, यह साफ है कि जो हवा पश्चिम उत्तरप्रदेश से बहेगी, वह अाने वाले चरणों में पार्टियों के आत्मविश्वास और मतदाता के मूड पर भी असर डालेगी।





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