Due to seven deaths in 10, spoiled lifestyle | 28 सालों में बीमारियों से मौताें का पैटर्न बदला, 10 में से 7 मौतें बिगड़ी जीवनशैली से

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  • हवा, पानी, जंगल, भोजन और जीवनशैली की अनदेखी ही 95% बीमारियों की वजह
  • 2018 में प्रदूषित हवा से होनी वाली डायबिटीज से 55 हजार से ज्यादा मौतें
  • देश में 61.8% मौतें जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से, 1990 में यह आंकड़ा 30.5% था

     

नई दिल्ली . बीते 28 वर्षों में देश में बीमारियों से मौताें का पैटर्न पलट गया है। अब 61.8% मौतें हार्ट डिसीज, कैंसर, डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से हो रही हैं। 1990 में यह आंकड़ा 30.5% था। मलेरिया, टीबी जैसे रोगों से मौतें आधी रह गई हैं। आज 95% बीमारियों का कारण सेहत के पंचतत्व- हवा, पानी, वन, भोजन और जीवनशैली की अनदेखी है। इसी पर नॉलेज रिपोर्ट…

 

15 से अधिक मेडिकल रिपोर्ट्स और देश के पांच शीर्ष डॉक्टर से बातचीत के आधार पर तैयार रिपोर्ट

 

दूषित हवा से डायबिटीज और भूलने की बीमारी बढ़ रही है  : देश में बीते साल वायु प्रदूषण ने 12 लाख जानें लीं। द स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट (2019) के मुताबिक इनमें से करीब 55 हजार मौतें दूषित हवा से होने वाली डायबिटीज के कारण हुईं। वायु में मिल रहे जहरीले कण शरीर में इंसुलिन पैदा करने की ताकत और रोगों से लड़ने की क्षमता को कम कर रहे हैं। इससे भूलने की बीमारी भी बढ़ रही है।

 

भोजन में कीटनाशक और प्लास्टिक मोटापा बढ़ा रहा है : पर्यावरण में कीटनाशक, प्लास्टिक में इस्तेमाल होने वाला बिस्फेनॉल ए और पानी में आर्सेनिक जैसे रसायनों से  मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है। देश में 15 से 49  साल आयु वर्ग के 20% लोग मोटापे के शिकार हैं। 2011 में भारत में गलत खान-पान से बीमार होने के 10 करोड़ मामले आए। इससे हर साल 4.2 लाख मौतें हो रही हैं।

 

गंदे पानी से पेट संबंधी ही नहीं दिल की बीमारियां भी हो रहीं : तंबाकू, शराब और जंक फूड के साथ ही दूषित पानी से भी दिल की बीमारियां हो रही हंै। उद्योगों और खेती में केमिकल के इस्तेमाल से भूजल भी दूषित हो रहा है। 50% जिलों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा अिधक है। इससे 23 करोड़ लोगों को पेट के कैंसर, स्नायु तंत्र, दिल की बीमारी का खतरा बढ़ गया है। 23.9% लोग आर्सेनिक युक्त पानी पी रहे हैं।

 

जंगल कटने से दुनियाभर में 500 महामारियां फैली हैं : 4 दशक में दुनिया में करीब 500 महामारियां फैली हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जंगलों की कटाई है। इससे मलेरिया, डेंगू, इबोला जैसी बीमारियां बढ़ी हैं। देश के ठंडे इलाकों में मलेरिया पैरासाइट 7 से 9 माह तक फैल रहा है। 2030 तक यह पूरे साल बना रहेगा। ब्राजील में सिर्फ 4.3% ज्यादा जंगल कटने से मलेरिया के मामले 50% तक बढ़ गए। 

 

खराब जीवनशैली से 65% युवाओं में डिप्रेशन के लक्षण : देश में बीमारियों से होने वाली मौतों में 61.8% लाइफ स्टाइल डिसीज से हो रही हैं। हर चौथा व्यक्ति इसकी जद में है। इससे  डिप्रेशन, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापा जैसी बीमारी हो रही हैं। 6.5% आबादी डिप्रेशन में है। 22 से 25 साल आयु वर्ग की 65% आबादी में डिप्रेशन के लक्षण हैं। 10 में से 1 महिला और 7 में से एक पुरुष को हाई ब्लड प्रेशर है। 

 

सेहत

 

देश की सेहत: 53% महिलाएं एनीमिक, 4.6 करोड़ बच्चे बौने, यह दुनिया में सबसे अधिक  : दुनिया में भारतीय महिला, पुरुष और बच्चे सेहत के कई मानकों पर सबसे बुरी स्थिति में हैं। सबसे ज्यादा एनीमिक महिलाएं और नाटे बच्चे हमारे यहां हैं। तंबाकू से सबसे ज्यादा मौतें भी भारत में ही हो रही हैं।

 

महिलाः देश में मां बनने योग्य 15 से 49 साल आयुवर्ग वाली 53% महिलाएं एनीमिक हैं। 20.7% मोटापे से पीड़ित हैं। 2005-06 में यह आंकड़ा 12.6% था। यानी 10 साल में 60% की वृद्धि हुई।

 

पुरुषः देश में 44.5% पुरुष तंबाकू और 29.2% शराब लेते हैं। हर मिनट तंबाकू सेवन से दो मौतें हो रही हैं। 18.6% पुरुष मोटापे के शिकार हैं। 2005-06 में यह आंकड़ा 9.3% था। यानी 100% की वृद्धि। 

 

बच्चेः कुपोषण से देश में 4.6 करोड़ बच्चे बौने हैं। यह दुनिया में सर्वाधिक। 100 साल में लड़कियों की औसत लंबाई 5 सेमी और लड़कों की 3 सेमी बढ़ी। औसत हाइट बढ़ने की ये दर दुनिया में सबसे कम है।





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