dhonis balidan gloves manufactured in meerut-ICC World Cup : …तो मेरठ के इस योगदान से उठा वर्ल्ड कप में तूफान

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ICC World Cup : ...तो मेरठ के इस योगदान से उठा वर्ल्ड कप में तूफान

भारत को अब अपने दूसरे मुकाबले में रविवार को ऑस्ट्रेलिया का सामना करना है. (फोटो-AP Photo/Aijaz Rahi)

News18Hindi

Updated: June 8, 2019, 9:47 AM IST

वर्ल्ड कप 2019 में टीम इंडिया अपने खेल से इतर भी सुर्खियों में है. भारत ने इस टूर्नामेंट में अपने अभियान की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका को छह विकेट से हराकर की. अब टीम को रविवार को गत चैंपियन ऑस्ट्रेलिया का सामना करना है. मगर अब सारा फोकस टीम इंडिया के प्रदर्शन से हटकर पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर जाकर ठहर गया है. हालात ये है कि हर जगह सिर्फ धोनी के विकेटकीपिंग ग्लव्स की ही चर्चा है.

दरअसल, भारतीय विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के बलिदान बैज ने वर्ल्ड कप में और उसके बाहर भी खूब सुर्खियां बटोरी हैं. मगर सोचने वाली बात ये है कि आखिर जिन ग्लव्स को लेकर आईसीसी और बीसीसीआई तक आमने-सामने आ गए, वे ग्लव्स आखिर बने कहां हैं. धोनी के ये विकेटकीपिंग दस्ताने कहीं और नहीं, बल्कि यूपी की क्रांति धरा मेरठ में बने हैं।

धोनी मेरठ की एक कंपनी द्वारा निर्मित क्रिकेट उत्पादों का प्रयोग करते हैं। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, धोनी ने विश्व कप से पहले मेरठ की एक स्पोर्ट्स कंपनी से विशेष तौर पर हरे रंग के साथ सेना का बैज लगवाकर दस्ताने बनवाए थे। और यह बात तो हम सभी जानते हैं कि खेल उत्पाद बनाने में मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का नाम अग्रणी है. यहां तक कि विदेश में भी मेरठ से ही इनका निर्यात होता है.

क्‍या है बलिदान बैज का मतलबबलिदान निशान पैरा स्‍पेशल फोर्सेज का सबसे बड़ा सम्‍मान होता है. इस निशान को हर कोई इस्‍तेमाल नहीं कर सकता है. यह निशान पैरा कमांडो लगाते हैं. इसे पहनने की योग्‍यता हासिल करने के लिए कमांडो को पैराशूट रेजीमेंट के हवाई जंप के नियमों पर खरा उतरना होता है. धोनी ने अगस्‍त 2015 में आगरा में पांच बार छलांग लगाकर बलिदान बैज को पहनने की योग्‍यता हासिल की थी. इसके बाद जब भी कमांडो अपनी वर्दी में होते हैं तो उनकी कैप पर चांदी से बना बलिदान का निशान लगा होता है.

 





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