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dharmendra birthday | मुंबई से 80Km दूर यहां इस खास तरीके की खेती कर रहे हैं धर्मेंद्र, इस खेती में पैसा भी लगता है कम और इनकम भी होती है ज्यादा, खुद सरकार भी चाहती है लोग करें इस तरह की खेती


फीचर डेस्क। बॉलीवुड के सुपरस्टार एक्टर धर्मेंद्र आज 83वां बर्थडे मना रहे हैं। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने फॉर्महाउस का एक वीडियो भी शेयर किया है। वीडियो के साथ उन्होंने कैप्शन लिखा- ‘गो ऑर्गेनिक ग्रो ऑर्गेनिक’। वीडियो में धर्मेंद्र बता रहे है कि वे अपने फॉर्महाउस में ऑर्गेनिक खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि ऑर्गेनिक सब्जियां सेहत के अच्छी होती है।

बता दें कि सरकार भी लगातार ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में हम बता रहे हैं कि ऑर्गेनिक खेती होती क्या है और इसके क्या फायदे हैं। धर्मेंद्र की तरह आप भी ऑर्गेनिक खेती शुरू कर सकते हैं। इसमें जहां खर्चा कम आता है तो वहीं इससे पैदा होने वाले प्रोडक्ट्स बेहद फायदेमंद होते हैं।

क्या होती है ऑर्गेनिक फर्मिंग

– ऑर्गेनिक फर्मिंग (जैविक खेती) में पेस्टीसाइड्स (कीटनाशक), फर्टिलाइजर, एंटीबायोटिक्स आदि का इस्तेमाल न के बराबर किया जाता है। ऑर्गेनिक फर्मिंग केमिकल फर्मिंग की अपेक्षा काफी सस्ती और टिकाऊ रहती है।

– इससे मिट्टी की गुणवत्ता कम नहीं होती बल्कि बढ़ती है। गोबर, पौधे और कचरे आदि से तैयार खाद भूमि को दी जाती है। इस कारण पौधों को भरपूर मात्रा में बिना केमिकल वाले पोषक तत्व मिलते हैं। जैविक खेती केमिकल्स से पूरी तरह से मुक्त रहती है।

– इस कारण इससे तैयार खाद्य पदार्थ खाने से बॉडी को भी किसी तरह का नुकसान नहीं होता। जैविक खेती में गोबर की खाद, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर आदि का इस्तेमाल करना जरूरी होता है।

क्यों जरूरी है ऑर्गेनिक फर्मिंग

– केमिकल और पेस्टीसाइड्स से खेती को लगातार नुकसान हो रहा है। इससे खेती का खर्चा भी बढ़ जाता है। पॉल्युशन बढ़ता है और इससे तैयार खाद्य पदार्थ खाने से हेल्थ को नुकसान पहुंचता है।

– किसान की इनकम का बहुत बड़ा हिस्सा पेस्टीसाइट्स और केमिकल में ही खर्च हो जाता है। इससे उसे मुनाफे की बजाए नुकसान होने लगता है।

– केमिकल के ज्यादा इस्तेमाल के चलते जमीन की सेहत भी बिगड़ रही है। इससे तैयार प्रोडक्ट सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि जानवरों के लिए भी बेहद नुकसानदायक हैं।

क्या हैं ऑर्गेनिक फर्मिंग के फायदे

– इससे जमीन की उर्वरक (फर्टिलाइजर) क्षमता बढ़ती है।

– पॉल्युशन नहीं होता। इससे एन्वायरमेंट अच्छा रहता है।

– कम पानी की जरूरत होती है।

– बिना केमिकल वाली फसल तैयार होती है। केमिकल, पेस्टीसाइड्स का खर्चा बचता है।

– वेस्ट प्रोडक्ट्स का खाद के तौर पर दोबारा उपयोग हो पाता है।

ऑर्गेनिक फर्मिंग करने से पहले इन चीजों को जरूर चेक कर लें

– मिट्टी की गुणवत्ता की जांच करवाएं। यदि मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व होने पर ही अच्छी फसल होगी।

– यदि गुणवत्ता पाई जाती है तो फिर एक्सपर्ट की देखरेख में उसे खेती के लिए तैयार करें।

– क्लाइमेट के हिसाब से ही फसल उगाएं। आपके क्षेत्र में जैसा मौसम रहता हो, उसी को देखते हुए चयन करें कि आपको किस चीज की खेती करना है। स्थानीय किसानों से सलाह लेना भी अच्छा होता है।





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