Cricket World Cup History: 5 most memorable games-ICC World Cup : ये पांच मैच, जिन्हें कभी नहीं भूलेंगे आप

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दुनिया का पहला आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप साल 1975 में इंग्लैंड में खेला गया था. तब से अब तक इसके 11 सीजन हो चुके हैं और 12वां इंग्लैंड में ही खेला जा रहा है. यूं तो हर वर्ल्ड कप में प्रशंसकों को रोमांचक मुकाबले देखने को मिलते हैं. इनमें से कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें देखकर अपनी आंखों पर विश्वास तक नहीं होता. रोमांच के इस चरम ने वर्ल्ड कप की दर्शक क्षमता में हमेशा नया रिकॉर्ड स्‍थापित किया है. उम्मीद है कि इस बार की कहानी भी इससे अलग नहीं होगी. देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कौन से मुकाबले ऐसे होंगे जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर आने वाली पीढ़ियों के जेहन में भी ‌जिंदा रहेंगे.

वर्ल्ड कप की खासियतों में से एक इसके सांस रोक देने वाले मुकाबले भी रहते हैं. जब-जब नया वर्ल्ड कप शुरू होता है, तो क्रिकेट के इस महाकुंभ के पुराने रोमांचक मुकाबलों की बातें भी शुरू हो जाती हैं. उन मुकाबलों से जुड़ी यादों के पिटारे खुलने लगते हैं.

यादों के इसी खजाने में से हम आपके लिए चुनकर लाए हैं वर्ल्ड कप के कुछ ऐसे मोती, जिन्हें पिरोए बिना क्रिकेट की माला पूरी नहीं हो सकती. तो चलिए रूबरू होते हैं, ऐसे ही पांच किस्सों से.

(फोटो-DIBYANGSHU SARKAR/AFP)

5. इंग्लैंड बनाम आयरलैंड (2011)
इंग्लैंड की मजबूत और आयरलैंड की कमजोर टीम के बीच यह मुकाबला बंगलोर के ‌एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला गया था, जिसे बाद में केविन ओ ब्रायन के मैच से जाना गया. इंग्लैंड की टीम कुछ दिन पहले ही भारतीय टीम के खिलाफ बेहतरीन मुकाबला खेलकर यहां उतर रही थी. इंग्लैंड की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 327 रन का बेहद मजबूत स्कोर खड़ा किया. इस स्कोर में केविन पीटरसन, इयान बेल और जोनाथन ट्रोट का अहम योगदान रहा.

कई लोगों ने सोचना शुरू कर दिया था कि यह कोई मुकाबला ही नहीं है. खासकर यह देखते हुए कि वर्ल्ड कप के इतिहास में इससे पहले इतना बड़ा स्कोर कभी हासिल नहीं किया जा सका था. इस तथ्य को सही साबित करने का काम आयरलैंड के शीर्ष क्रम ने किया. आयरलैंड तब 111 रन तक पांच विकेट गंवा चुका था. हालांकि दाएं हाथ के बल्लेबाज केविन ओ ब्रायन शायद कुछ और ही सोचकर मैदान में उतरे थे. उन्होंने इंग्लिश गेंदबाजों की धुनाई शुरू कर दी और गेंद को दर्शक दीर्घा में पहुंचाना शुरू कर दिया. देखते ही देखते उन्होंने महज 50 गेंदों पर अपना शतक पूरा कर लिया. जानकर हैरानी होगी कि यह अब भी वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे तेज शतक है.

(फोटो-एएफपी)

4. भारत-पाकिस्तान (2003)
वर्ल्ड कप में जिस एक मुकाबले का हर किसी को शिद्दत से इंतजार रहता है, वह है भारत-पाकिस्तान भिड़ंत. कोई इसे महामुकाबला बताता है तो कोई टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मैच. 2003 के वर्ल्ड कप में ये दोनों टीमें इसी प्रतिद्वंद्विता को आगे बढ़ाते हुए सेंचुरियन में टकराई थीं. हालांकि 2003 के इस विश्व कप में उतर रही पाकिस्तान की टीम वैसी मजबूत नहीं थी, जैसी कि हुआ करती थी. मगर इंजमाम उल हक, सईद अनवर, शोएब अख्तर, वसीम अकरम और वकार यूनिस की मौजूदगी वाली टीम को खारिज नहीं किया जा सकता था. खासतौर पर यह देखते हुए कि अनवर भारतीय टीम के गेंदबाजी आक्रमण का भरपूर लुत्फ उठाते थे.

अनवर यहां भी नहीं चूके और उन्होंने शानदार शतक जड़ दिया. टीम इंडिया को सेंचुरियन की मुश्किल पिच पर 274 रन का लक्ष्य मिला, जिसे हासिल करना आसान काम कतई नहीं था. मगर जिस टीम में सचिन तेंदुलकर हो, वो कुछ भी कर सकती है. सचिन ने मैदान पर उतरते ही पाकिस्तान के गेंदबाजों की धुनाई शुरू कर दी. शोएब अख्तर की बाउंसर पर आउट होने से पहले सचिन ने महज 75 गेंदों पर ताबड़तोड़ 98 रन ठोक डाले. इसके बाद राहुल द्रविड़ और युवराज सिंह ने सुनिश्चित किया कि सचिन की मेहनत बेकार न जाए. भारतीय टीम ने 46वें ओवर में यह मैच जीत लिया. बेशक यह मुकाबला आखिरी ओवर तक नहीं गया, लेकिन जिस अंदाज में सचिन ने पाक गेंदबाजों की गेंदों पर कट और पुल शॉट खेलकर रन बटोरे, वह देखना सुखद अनुभव था. ऐसा अनुभव जो हमेशा के लिए जेहन में कैद हो गया. खासकर अख्तर की गेंद पर ऑफ साइड पर कट कर लगाया गया खूबसूरत छक्का.

(फोटो-Hannah Peters/Getty Images)

3. न्यूजीलैंड-दक्षिण अफ्रीका
यह मुकाबला 2015 के वर्ल्ड कप में खेला गया. न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच ऑकलैंड में हुआ यह मैच सेमीफाइनल था और दोनों टीमों को जीत की उम्मीद थी. इनमें से कोई भी टीम वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह नहीं बना सकी थी और अब यह मौका बिल्कुल इनके सामने था. पहले बल्लेबाजी करते हुए दक्षिण अफ्रीका के लिए फाफ डुप्लेसी ने 82 रन बनाकर मजबूत नींव रखी. हालांकि यहां बारिश ने अहम भूमिका निभाई और खेल की गति बाधित होने के चलते दक्षिण अफ्रीका की लय टूट गई. बारिश के बाद खेल शुरू हुआ तो एबी डीविलियर्स और डेविड मिलर ने टीम को निर्धारित 43 ओवर में 5 विकेट पर 281 रन तक पहुंचा दिया.

डकवर्थ लुइस प्रणाली के तहत न्यूजीलैंड को 43 ओवर में 298 रन का लक्ष्य मिला. मेजबान टीम को ब्रैंडन मैकुलम ने धुआंधार शुरुआत दिलाई. इस दौरान उन्होंने डेल स्टेन की जमकर खबर ली. हालांकि उनके आउट होने के बाद न्यूजीलैंड की टीम एक समय 22 ओवर में 149 रन पर चार विकेट खोकर संकट में फंस गई थी. इसके बाद कोरी एंडरसन और ग्रांट इलियट ने 103 रन की साझेदारी कर टीम को संभाला. इसके बाद एंडरसन और ल्यूक रोंची के विकेट जल्दी गिरने से एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका का पलड़ा भारी हो गया. अब सारी जिम्मेदारी इलियट पर थी और उन्होंने एक गेंद शेष रहते टीम को जीत दिला ही दी. इसी के साथ ही न्यूजीलैंड ने पहली बार वर्ल्ड कप के फाइनल में प्रवेश किया. एक और नॉकआउट मैच हारने के बाद दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ियों पर मैदान पर बैठ जाने की तस्वीरें क्रिकेट प्रशंसकों के लिए दिल तोड़ने वाली थीं.

(फोटो-Dave Cannon/Allsport)

2. भारत-वेस्टइंडीज (1983 वर्ल्ड कप फाइनल)
मौजूदा दौर में क्रिकेट में हाई स्कोरिंग मैच बेहद आम बात हो गई है. मगर अब भी ये कम स्कोर वाले कड़े और रोमांचक मुकाबलों की जगह नहीं ले सकते. ऐसे मैचों में एक छोटी सी चूक आप पर भारी पड़ सकती है. इसलिए हर कदम फूंक-फूंककर रखना होता है. लौटते हैं 1983 के वर्ल्ड कप में. यह वो दौर था जब क्रिकेट अपनी जमीन तलाश ही रहा था. अधिकतर खिलाडी तेज खेलने के विचार से अछूते थे. ऐसे में वर्ल्ड कप का फाइनल बिल्कुल अपने मिजाज के हिसाब से लो स्कोरिंग ही रहा.

वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर भारत को बल्लेबाजी दे दी. एंडी रॉबर्ट्स, माइकल होल्डिंग और मैल्कम मार्शल जैसे गेंदबाजों के सामने भारतीय बल्लेबाजी उखड़ सी गई. टीम ने 183 रन का स्कोर खड़ा किया जिसे हासिल करना विव रिचर्ड्स, डेसमंड हेंस, गोर्डन ग्रीनीज और क्लाइव लॉयड जैसे बल्लेबाजों के लिए मामूली बात थी. मगर कई अन्य मौकों की तरह भारतीय टीम ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तभी किया जब उसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी. हालांकि वेस्टइंडीज ने ठोस शुरुआत की थी, लेकिन मदन लाल ने रिचर्ड्स का विकेट लेकर समीकरण ही बदल दिए. इसके बाद वेस्टइंडीज की पारी को समेटने का जिम्मा मोहिंदर अमरनाथ ने उठाया. अमरनाथ ने जैसे ही होल्डिंग को आउट किया भारत ने क्रिकेट की सुपरपावर बनने का सपना देखना शुरू कर दिया.

(फोटो-Ross Kinnaird/Getty Images)

1. ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका (1999 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल)
1990 का यह वो दशक था जब वेस्टइंडीज की बादशाहत खत्म हो गई थी और ऑस्ट्रेलिया का दबदबा शुरू. 1996 में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने फाइनल में तो जगह बनाई थी, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ उसे हार का सामना करना पड़ा. मगर इंग्लैंड में 1999 में हुए वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलियाई टीम पूरे रंग में थी. हालांकि स्टीव वॉ की अगुआई में टीम को कई उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था, लेकिन टीम अहम मौकों पर दबाव से पार पाने में सफल रही और सेमीफाइनल में पहुंच गई. यहां भिड़ंत दक्षिण अफ्रीका से थी. पहले बल्लेबाजी कर रही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 68 रनों पर चार विकेट गंवा दिए थे, लेकिन फिर वॉ और माइकल बेवन ने टीम को 213 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया. जवाब में दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत भी खास नहीं रही और उसने 61 रनों तक आते-आते चार विकेट गंवा दिए थे. मगर मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाजों ने टीम को मुकाबले में बनाए रखा.

लांस क्लूजनर इससे पहले भी कई बार मुश्किल हालात से टीम को उबार चुके थे. इस बार भी उन्होंने इसका जिम्मा उठाया. लेकिन एजबेस्टन की वह रात क्लूजनर का नहीं थी. टीम को आखिरी ओवर में नौ रनों की दरकार थी. बाएं हाथ के बल्लेबाज क्लूजनर ने शुरुआती दो गेंदों पर दो चौके जड़ दिए. इसके बाद विजेता का अनुमान लगाना मुश्किल काम नहीं था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
तीसरी गेंद पर बेवजह रन लेने की कोशिश कर रहे एलन डोनाल्ड आउट होते-होते बच गए. मगर अगली ही गेंद पर जब रन लेने की जरूरत थी, तब डोनाल्ड मानो अपने पैर उठा ही नहीं सके. इस रन आउट के साथ ही दक्षिण अफ्रीका के हाथ से वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाने का सुनहरा मौका भी छूट गया. मैच टाई रहा और टूर्नामेंट में लीग मैच में मिली जीत के चलते ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में जगह बना ली.

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