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BJP manifesto 2019 Article 35A: everything need to know about This | बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में जिस अनुच्छेद को हटाने का वादा किया है, उसकी वजह से कश्मीर में लग सकती है आग


नेशनल डेस्क, नई दिल्लीबीजेपी ने लाेकसभा चुनाव 2019 के लिए सोमवार पार्टी घोषणा पत्र जारी कर दिया। इसे उन्होंने संकल्प पत्र नाम दिया है। कई तरह के वादों के बीच बीजेपी ने कश्मीर से अनुच्छेद 35A हटाने का वादा कर डाला है। इसे लेकर पहले भी कश्मीर से लेकर नई दिल्ली तक सियासत गर्म हो चुकी है। हाल ही में जम्मू- कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने केंद्र में मोदी सरकार को चेतावनी दे डाली है कि अगर इस अनुच्छेद को खत्म किया तो कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा। हालांकि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अब सवाल उठते हैं कि आखिर ये अनुच्छेद अनुच्छेद 35A है, जिस पर इतना बवाल है। इसे हटाने की बात को लेकर इतना विरोध क्यों है? इसे हटाने के बाद कश्मीर पर क्या असर होगा? इन सवालों के जवाब जानते हैं?

सवाल: क्या है आर्टिकल 35A?

जवाब: इस अनुच्छेद में कुछ बातें ऐसी हैं, जो इसे देश के बाकी राज्यों से अलग बनाती हैं। मसलन, अनुच्छेद 35ए जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकार को यह अधिकार देता है कि वो ये तय कर सकें कि राज्य का स्थायी निवासी कौन है। राज्य के स्थायी नागरिकों को कुछ खास अधिकार मिलते हैं। सारा विवाद इन्हीं अधिकारों को लेकर है। आर्टिकल 35ए के मुताबिक, सिर्फ वही व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर का स्थायी नागरिक है, वो यहां जमीन खरीद सकता है, यहां स्थायी तौर पर रह सकता है, सरकारी नौकरी हासिल कर सकता है या स्कॉलरशिप का हकदार हो सकता है। साधारण भाषा में कहें तो जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को देश के बाकी राज्यों से अलग विशेष सुविधाएं दी गईं हैं और इन्हें संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई है। कश्मीर की कोई लड़की राज्य के बाहर के किसी लड़के से शादी कर लेती है तो उसके जम्मू की प्रॉपर्टी से जुड़े सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं। साथ जम्मू-कश्मीर की प्रॉपर्टी से जुड़े उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।

सवाल: आखिर कब लाया गया था अनुच्छेद 35ए या Article 35A और उस वक्त किसकी सरकार थी?
जवाब: बात शुरू होती है 1954 से। केंद्र में जवाहर लाल नेहरू की अगुआई वाली कांग्रेस सरकार थी। इसी सरकार की सलाह पर तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इस अनुच्छेद को जम्मू-कश्मीर में लागू करने की संवैधानिक मंजूरी दी थी।

सवाल: कहां से शुरू होता है विवाद?
जवाब: 1927 में कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर की प्रशासनिक सेवाओं में पंजाब के लोगों को नियुक्त करने का विरोध किया। इसके बाद राज्य के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को कुछ विशेषाधिकार दिए। आजादी के बाद 1952 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने जम्मू-कश्मीर की सत्ता पर काबिज शेख अब्दुल्ला से एक समझौता किया। इसे ‘दिल्ली समझौता’ कहा जाता है। इसमें तय शर्तों के आधार पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को कुछ खास सुविधाएं और स्थायी नागरिकता दी गई।

सवाल: किसे माना जाता है जम्मू-कश्मीर का स्थाई नागरिक?
जवाब: वैसे तो जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक, वहां का स्थायी नागरिक वह है, जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहां संपत्ति हासिल की हो। हरि सिंह के जारी किए नोटिस के अनुसार, जम्मू-कश्मीर का स्थाई नागरिक वह है, जो जम्मू-कश्मीर में ही 1911 या उससे पहले पैदा हुआ और रहा हो। या जिन्होंने कानूनी तौर पर राज्य में प्रॉपर्टी खरीद रखी है। जम्मू-कश्मीर का गैर स्थायी नागरिक लोकसभा चुनावों में तो वोट दे सकता है, लेकिन वो राज्य के स्थानीय निकाय यानी पंचायत चुनावों में वोट नहीं दे सकता।

सवाल: अब ये मुद्दा क्यों उठा?
जवाब: We the Citizens नामक एक गैर-सरकारी संगठन ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। इसमें मांग की गई थी कि अनुच्छेद 35ए को हटा दिया जाए। एक याचिका में इस अनुच्छेद को लैंगिग भेदभाव के तौर पर पेश किया गया।

सवाल: मोदी सरकार का क्या नजरिया है?

जवाब: केंद्र की वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार अनुच्छेद 35ए के पक्ष में खड़ी नहीं दिखती। अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस मुद्दे पर देशव्यापी और व्यापक बहस की जरूरत है। पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अबदुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी अनुच्छेद को हटाने के खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं।

सवाल: घाटी के लोगों को क्या डर है?
जवाब: मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, खूफिया एजेंसियों के सूत्रों के जरिए पता चला है कि अगर सुप्रीम कोर्ट आर्टिकल 35A के खिलाफ निर्णय देता है तो कश्मीर में पुलिस ‘विद्रोह’ भी हो सकता है और बड़े स्तर पर अशांति फैल सकती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि अगर आर्टिकल 35A खत्म हो जाता है तो बड़े स्तर पर घाटी की मुस्लिम बहुल जनसंख्या में बदलाव आ सकते हैं. साथ ही यह कई मामलों में जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता को भी कम कर देगा। साथ ही प्राइवेट सेक्टर निवेश भी इन कानूनों के चलते प्रभावित होता है।

सवाल: किन लोगों को आज नहीं मिला इस कानून का अधिकार
जवाब: अनुच्छेद 35A की वजह से जम्मू कश्मीर में पिछले कई दशकों से रहने वाले बहुत से लोगों को कोई भी अधिकार नहीं मिला है। 1947 में पश्चिमी पाकिस्तान को छोड़कर जम्मू में बसे हिंदू परिवार आज तक शरणार्थी हैं। एक आंकड़े के मुताबिक 1947 में जम्मू में 5 हज़ार 764 परिवार आकर बसे थे। इन परिवारों को आज तक कोई नागरिक अधिकार हासिल नहीं हैं। अनुच्छेद 35A की वजह से ये लोग सरकारी नौकरी भी हासिल नहीं कर सकते। और न ही इन लोगों के बच्चे यहां व्यावसायिक शिक्षा देने वाले सरकारी संस्थानों में दाखिला ले सकते हैं।





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