BJP can increase seats in Odisha and Bengal, and vote in Kerala | ओडिशा, बंगाल में भाजपा बढ़ा सकती है सीटें और केरल में वोट

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संजय कुमार, प्रोफेसर सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज़ (सीएसडीएस). पहले चरण के चुनाव से पहले यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या एनडीए फिर सत्ता में आएगा या बदलाव होगा? पुलवामा हमला व बालाकोट एयर स्ट्राइक से पहले ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस वापसी कर रही है और वह भाजपा को कड़ी चुनौती पेश करने जा रही है। लेकिन, पुलवामा हमले के बाद की घटनाओं ने हिन्दीभाषी क्षेत्र में भाजपा को होने वाले नुकसान को काफी कम कर दिया है। देखा जाए तो पुलवामा के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि भाजपा कितनी सीटें जीतेगी।

 

भाजपा ने कांग्रेस पर हिंदी भाषी क्षेत्रों में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। लोग अब भी बेरोजगारी को बड़ा मुद्दा मानते हैं पर उनकी नजरों में सरकार की ऐसी छवि बन गई है, जो पाकिस्तान को जवाब दे सकती है। विपक्ष के पास नरेंद्र मोदी के ताकतवर नेतृत्व का कोई विकल्प नहीं है। बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो देश में मजबूत नेता चाहते हैं और मोदी उनकी पसंद पर खरे उतरते हैं। 2004 में एक कमजोर कांग्रेस अटल बिहारी वाजपेयी जैसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री को हरा सकती है तो नरेंद्र मोदी क्यों नहीं हार सकते। वाजपेयी ने भी तो कारगिल युद्ध में जीत हासिल की थी। इस पर मेरा जवाब है कि 2004 और 2019 की स्थिति की तुलना नहीं की जा सकती। कांग्रेस 2004 के चुनाव में उतरी थी तो उसके पास 28 फीसदी का वोट बेस था, जो उसे 1999 में मिले थे, लेकिन आज कांग्रेस सिर्फ 19.60 फीसदी पर है और अगर वह 6-7 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं जोड़ सकती तो इतने वोट सौ सीटे लाने के लिए भी काफी नहीं है।

 

मोदी सरकार को हराने के लिए विपक्ष को न केवल कठिन सवाल उठाकर उसे घेरना होगा, बल्कि विपक्ष को सरकार विरोधी मतों का बिखरावरोकने के लिए गठबंधन भी बनाना होगा। लेकिन, न तो कांग्रेस ही इतनी मजबूत हुई है कि वह अकेले भाजपा को हरा दे और न विपक्ष गठबंधन बनाने में कामयाब रहा। कांग्रेस यूपी में महागठबंधन का हिस्सा बनने में नाकाम रहने के साथ ही अब तक दिल्ली में आप से गठबंधन भी नहीं कर सकी है। कांग्रेस का महाराष्ट्र में एनसीपी से गठबंधन है पर गुजरात में नहीं। ऐसे हालात में 2019 मे मोदी को हराना बहुत ही कठिन दिखता है।

 

बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भाजपा हिन्दी राज्यों में अपने नुकसान की काफी हद तक भरपाई करती हुई दिख रही है। हालांकि, यह सच है कि इन राज्यों में भाजपा 2019 का प्रदर्शन तो नहीं दोहरा पाएगी। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद भाजपा को 17 और कांग्रेस को सिर्फ 12 लोकसभा सीटों पर ही बढ़त मिल सकी थी। राजस्थान में भाजपा 13 और कांग्रेस 12 सीटों पर आगे रही। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को फायदा है। अगर भाजपा दो प्रतिशत और वोट भी जोड़ने में सफल रहती है तो उसे काफी फायदा हो सकता है। कांग्रेस 2019 में वोट शेयर तो बढ़ा सकती है, लेकिन उसे जबरदस्त स्विंग की जरूरत होगी।

 

पश्चिम बंगाल और उड़ीसा जैसे राज्यों में भाजपा 2014 में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। रिपोर्ट कहती हैं कि भाजपा यहां संख्या बढ़ा रही है, सवाल यही है कि कितनी? दक्षिण के राज्यों में भाजपा की संख्या 2014 के समान ही रहेगी, केरल में भाजपा अपने वोट जरूर बढ़ा सकती है। अगर आने वाले हफ्तों में कुछ अप्रत्याशित नहीं होता है तो भाजपा 2014 का चुनाव जीतती हुई दिख रही है।





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