Business News

Banks Can Sell Only One Third Shares Of Jet Airways Due To Sbi Ruling – जेट एयरवेज में एक तिहाई हिस्सेदारी ही बेच सकेंगे बैंक, प्रभावित हो सकती है नीलामी


ख़बर सुनें

एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों के समूह को जेट एयरवेज में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरबीआई का एनपीए संबंधी सर्कुलर रद्द होना कर्जदाताओं की राह का रोड़ा बन गया है। इस बीच, सोमवार को बैंक समूह ने विमानन कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली प्रक्रिया शुरू कर दी, लेकिन वे सिर्फ एक तिहाई शेयर ही बेच सकेंगे।

दरअसल, एसबीआई की अगुवाई वाले कर्जदाताओं के समूह ने जेट एयरवेज को 1,500 करोड़ की मदद के बदले 51 फीसदी हिस्सेदारी ली थी। इस प्रक्रिया में कंपनी के पूर्व चेयरमैन ने उनके पास 11.4 करोड़ शेयर गिरवी रखे थे। कर्जदाताओं की मंशा इन शेयरों का 75 फीसदी हिस्सा यानी 8.5 करोड़ शेयर बेचने की है और सोमवार से शुरू हुई बोली प्रक्रिया में उन्होंने इतने हिस्से के लिए ही रुचि-पत्र भी मांगे हैं। 

एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि फिलहाल बैंक के पास गिरवी रखे शेयरों में से सिर्फ 32 फीसदी हिस्से यानी 3.5 करोड़ शेयर पर ही उसका अधिकार है, जिसे वह बेच सकता है। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा हिस्सेदारी बेचने के लिए बैंक को आरबीआई या शीर्ष अदालत से अनुमति लेनी होगी अथवा नए सर्कुलर का इंतजार करना होगा। 

गोयल से करेंगे बातचीत

एसबीआई अधिकारी के अनुसार, कर्ज संकट से जूझ रही विमानन कंपनी को तत्काल पैसों की जरूरत है। हम अनुमति या आरबीआई के नए सर्कुलर का इंतजार नहीं कर सकते। ऐसे में कर्जदाता और बोली प्रक्रिया की देखरेख कर रहे एसबीआई कैप ने पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल व साझीदार कंपनी एतिहाद से बातचीत कर ज्यादा शेयरों की बिक्री का रास्ता निकाल रहे हैं। गौरतलब है कि आरबीआई का सर्कुलर रद्द होने से रणनीतिक रूप से जेट की हिस्सेदारी पहले जैसी हो गई है, जिसमें 51 फीसदी नरेश गोयल और 24 फीसदी एतिहाद के पास था।

10 अप्रैल तक जमा होंगे रुचि-पत्र

एसबीआई ने सोमवार को जारी निविदा में बताया कि बोलीदाताओं को रुचि-पत्र तैयार करने और जमा करने का खर्च खुद उठाना होगा। कर्जदाता या आधिकारिक प्रतिनिधि किसी भी स्थिति में इन खर्चों को वहन करने के जिम्मेदार नहीं होंगे। बोलीदाता 10 अप्रैल शाम 6 बजे तक रुचि-पत्र जमा कर सकते हैं। 

एक हजार करोड़ से लगा सकते हैं बोली

एसबीआई के अनुसार, कोई भी रणनीतिक निवेशक एक हजार करोड़ से ज्यादा की बोली से प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसमें व्यक्तिगत, विदेशी नागरिक, एनआरआई या कंपनियों के समूह की ओर से रुचि-पत्र जारी किए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, एतिहाद एयरवेज सहित केकेआर, ब्लैकस्टोन, टीपीजी कैपिटल जैसी कंपनियां बोली प्रक्रिया की दौड़ में शामिल हैं।

खास बातें

  • 75 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए कर्जदाताओं ने मांगे हैं रुचि-पत्र
  • 32 फीसदी शेयरों पर ही एसबीआई का नियंत्रण, जिसकी बिक्री कर सकता है
एसबीआई की अगुवाई वाले बैंकों के समूह को जेट एयरवेज में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरबीआई का एनपीए संबंधी सर्कुलर रद्द होना कर्जदाताओं की राह का रोड़ा बन गया है। इस बीच, सोमवार को बैंक समूह ने विमानन कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली प्रक्रिया शुरू कर दी, लेकिन वे सिर्फ एक तिहाई शेयर ही बेच सकेंगे।

दरअसल, एसबीआई की अगुवाई वाले कर्जदाताओं के समूह ने जेट एयरवेज को 1,500 करोड़ की मदद के बदले 51 फीसदी हिस्सेदारी ली थी। इस प्रक्रिया में कंपनी के पूर्व चेयरमैन ने उनके पास 11.4 करोड़ शेयर गिरवी रखे थे। कर्जदाताओं की मंशा इन शेयरों का 75 फीसदी हिस्सा यानी 8.5 करोड़ शेयर बेचने की है और सोमवार से शुरू हुई बोली प्रक्रिया में उन्होंने इतने हिस्से के लिए ही रुचि-पत्र भी मांगे हैं। 

एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि फिलहाल बैंक के पास गिरवी रखे शेयरों में से सिर्फ 32 फीसदी हिस्से यानी 3.5 करोड़ शेयर पर ही उसका अधिकार है, जिसे वह बेच सकता है। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा हिस्सेदारी बेचने के लिए बैंक को आरबीआई या शीर्ष अदालत से अनुमति लेनी होगी अथवा नए सर्कुलर का इंतजार करना होगा। 





Source link

About the author

Non Author

Leave a Comment