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281 AND BEYOND by VVS Laxman Claimed Greg Chappell didnt know how to run International Team | चैपल में प्रबंधन क्षमता का अभाव, नहीं पता कैसे संभाली जाती है अंतरराष्ट्रीय टीम : लक्ष्मण


नेशनल डेस्क, नई दिल्ली. टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने अपनी किताब के जरिए ग्रेग चैपल पर निशाना साधा है। लक्ष्मण के मुताबिक, ग्रेग चैपल को नहीं पता था कि एक अंतरराष्ट्रीय टीम को कैसे संभाला जाता है। वे बहुत ही कठोर और ऐसे व्यक्ति थे, जिनके पास जरा भी लचीला रवैया नहीं था। लक्ष्मण की आत्मकथा ‘281 एंड बियांड’ का कुछ दिन पहले ही विमोचन हुआ है। ग्रेग चैपल मई 2005 से अप्रैल 2007 तक टीम इंडिया के कोच रहे थे। उनका कार्यकाल काफी विवादित रहा था।

चैपल के पसंदीदा खिलाड़ियों की विशेष देखभाल होती थी

# लक्ष्मण ने ‘281 एंड बियांड’ में लिखा है, चैपल के नेतृत्व में टीम इंडिया दो या तीन खेमों में बंट गई थी। उनके कार्यकाल के दौरान टीम के खिलाड़ियों के बीच एक-दूसरे में विश्वास का घोर अभाव था। ग्रेग चैपल ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के चयनकर्ता भी रह चुके हैं।

# लक्ष्मण के मुताबिक, चैपल के अपने कुछ पसंदीदा खिलाड़ी थे। जो उनके पसंदीदा खिलाड़ी थे उनकी बहुत ही अच्छी तरह से देखभाल की गई, जबकि अन्य को उनके हाल पर छोड़ दिया गया। मेरे देखते ही देखते टीम कई खेमों में बंट गई।

# लक्ष्मण ने किताब में टेस्ट क्रिकेट से विवादास्पद तरीके से संन्यास, बचपन के किस्सों समेत कई अहम बातों पर भी खुलकर चर्चा की है। लक्ष्मण ने कप्तान धोनी के साथ रिश्तों के बारे में भी किताब में बताया है। उन्होंने बताया है कि संन्यास लेने पर कैसे उन्होंने पिता और सचिन तेंडुलकर की सलाह ठुकरा दी थी।

# लक्ष्मण ने लिखा कि चैपल के पूरे कार्यकाल के दौरान ड्रेसिंग रूम का माहौल कभी अच्छा नहीं रहा। वे अपने रवैए को लेकर जिद्दी थे। उनके रवैए में लचीलेपन का अभाव था। उन्हें यह नहीं पता था कि किसी अंतरराष्ट्रीय टीम को कैसे साथ लेकर चला जाता है।

# चैपल भूल गए थे कि वे भी एक क्रिकेटर थे। वे भूल गए थे कि वे स्टार खिलाड़ी थे न कि कोच। वे बहुत ज्यादा समर्थन के साथ भारत के कोच बने थे, लेकिन उन्होंने टीम को खेमों में बांट दिया। मैच के रिजल्ट बताते हैं कि उनके कुछ तरीके तो सफल रहे, लेकिन उनका उन नतीजों का कोच चैपल के साथ कोई संबंध नहीं था।

# लक्ष्मण का मानना है कि चैपल एक कठोर, बेअदब, बहुत ज्यादा सलाह देने वाले और जिद्दी व्यक्ति थे। उनके भीतर प्रबंधन क्षमता का घोर अभाव था। लक्ष्मण ने लिखा है कि वे बल्लेबाज चैपल का हमेशा सम्मान करते हैं, लेकिन कोच चैपल के बारे में नहीं ऐसा नहीं है।





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