25 june 1983 : india won its first cricket world cup-सुनहरा दिन : 36 साल पहले आज ही के दिन टीम इंडिया ने जीता था पहला वर्ल्ड कप

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आज 25 जून है. 36 साल पहले साल 1983 में इसी दिन भारतीय क्रिकेट का इतिहास सुनहरे पन्नों पर दर्ज हुआ था. ये वही दिन है जब 1983 के वर्ल्ड कप फाइनल में दो बार की चैंपियन वेस्टइंडीज को मात देकर कपिल देव की टीम ने 75 करोड़ लोगों का सपना साकार किया था.

भारत दो बार की चैंपियन वेस्ट इंडीज के खिलाफ विश्वकप फाइनल खेलने वाला था. लॉर्ड्स के मैदान पर जब वेस्ट इंडीज के सामने क्रिकेट प्रेमियों ने भारत को देखा तो सभी हैरान थे. किसी ने ये नहीं सोचा था कि भारत विश्वकप जीतने से बस एक कदम दूर खड़ा होगा. यह स्थान अपने आप में और भी बड़ा इसलिए था क्योंकि भारत ने यहां पहुंचते हुए इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी उस समय की दिग्गज टीमों को चित कर फाइनल में जगह बनाई थी. और जब भारतीय टीम ने विंडीज को हराकर फाइनल अपने नाम किया तो लॉर्ड्स की बालकनी में विश्व कप हाथ में थामे कपिल देव की तस्वीर लोगों के जेहन में हमेशा के लिए अमर हो गई.

दिलचस्प बात ये है कि वर्ल्ड कप 2019 भी इंग्लैंड में ही खेला जा रहा है. हर कोई भारतीय टीम से कप की उम्मीद कर रहा है. अब तक भारत ने अपने सभी मैच जीते हैं और अपनी प्रतिष्ठा के अनुसार प्रदर्शन किया है. 14 जुलाई को एक बार फिर जब लॉर्ड्स के मैदान पर विश्वकप फाइनल खेला जाएगा, तो भारतीय प्रशंसक यही उम्मीद करेंगे कि टीम 1983 जैसा प्रदर्शन दोहराते हुए विश्व विजेता बनेगी और वनडे क्रिकेट में 1983 और 2011 के बाद तीसरी बार दुनिया फतह करेगी.

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यशपाल शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 89 रन की मैच विजयी पारी खेली. (फोटो-ट्विटर)

दो बार की चैंपियन विंडीज को हराकर शुरू किया अभियान
9 जून 1983 : इस ऐतिहासिक वर्ल्ड कप के पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने दो बार की चैंपियन वेस्टइंडीज को हराकर अपने अभियान की शुरुआत की. इंडीज पेस बैटरी के सामने भारत विश्वकप का अपना सबसे बड़ा स्कोर बनाएगा, ये किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी. मगर यशपाल शर्मा ने गज़ब का धैर्य दिखाते हुए 89 रनों की पारी खेल डाली और भारत को 262 रनों के चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचा दिया. जवाब में वेस्ट इंडीज की टीम 228 रन ही बना पाई. टीम इंडिया के मौजूदा कोच रवि शास्त्री ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए महज़ 26 रन देकर 3 विकेट झटके. इस जीत के साथ ही भारत ने सबको बता दिया कि टीम इस बार अलग इरादों के साथ मैदान पर उतरी है.

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सैयद किरमानी की शानदार विकेटकीपिंग की वजह से मिली टीम इंडिया को जीत. (फाइल फोटो)

किरमानी के 5 कैच और जिम्बाब्वे पर 5 विकेट की जीत
11 जून 1983 : भारत ने जिस तरह अपने पहले मैच में वेस्टइंडीज की मजबूत टीम को हराया था, वैसे ही, ज़िम्बाब्वे ने अपने पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को हराकर क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी थी. भारत का अगला मुकाबला ज़िम्बाब्वे से था. बारिश के कारण देरी से शुरू हुए मैच में भारतीय गेंदबाज़ों ने ज़िम्बाब्वे की पारी को 155 रनों पर समेट दिया था. सैयद किरमानी ने उस मैच में कुल 5 कैच पकड़ कर एक विकेटकीपर द्वारा विश्वकप की एक पारी में सबसे ज़्यादा कैच पकड़ने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था. भारतीय ओपनर्स के सस्ते में निपट जाने के बाद मोहिंदर अमरनाथ और संदीप पाटिल ने पारी संभालकर भारत की झोली में जीत डाल दी. भारत ने ये मुकाबला 5 विकेट से जीत कर मैच अपने नाम किया.

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ट्रैवर चैपल के शतक की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने 162 रन से दर्ज की जीत. (फोटो-PA)

ऑस्ट्रेलियाई दीवार नहीं लांघ सका भारत, 162 रन से हारा
13 जून 1983 : भारत का ये मुकाबला उस समय की सबसे अच्छी टीमों में से एक ऑस्ट्रेलिया से था. नॉटिंघम के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ों ने भारतीय गेंदबाज़ों की जमकर धुलाई की और 320 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया. ट्रेवर चैपल ने 110 रनों की शानदार पारी खेली. भले ही कपिल देव ने पारी में 5 विकेट झटके थे, पर ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ों ने भारत के सामने बहुत बड़ी चुनौती पेश की. अपना पांचवा ही वनडे खेल रहे केन मैकले ने भारतीय बल्लेबाज़ों को पिच पर टिकने नही दिया और 6 विकेट झटक लिए. भारत की पूरी पारी 158 रनों पर सिमट गई और ऑस्ट्रेलिया ने 162 रनों के विशाल अंतर से यह मुकाबला जीता. भारत का 1983 विश्वकप में यह सबसे खराब प्रदर्शन था.

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विवियन रिचर्ड्स ने शानदार शतक लगाकर भारत के खिलाफ वेस्टइंडीज को जीत दिलाई. (फाइल फोटो)

इस बार जीता विंडीज, विवियन रिचर्ड्स ने जड़ा शतक
15 जून 1983 : भारत वेस्ट इंडीज से एक बार फिर टकराया, पर इस बार नतीजा उसके पक्ष में नही था. वेस्ट इंडीज ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए विवियन रिचर्ड्स के शानदार शतक के दम पर 9 विकेट खोकर 282 रन बनाए. भारत लक्ष्य का पीछा करते हुए सिर्फ 216 रन बना सका. मोहिंदर अमरनाथ ने 80 रनों की पारी खेलकर भारतीय टीम को जीत की दहलीज़ पर पहुंचाने का प्रयास किया, पर वो इसमें सफल नहीं हो पाए. ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 66 रनों से पछाड़ दिया. भारत ने विश्वकप में जो चमकदार शुरुआत की थी, वो चमक फीकी पड़ती नज़र आ रही थी.

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कपिल देव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेली. (फाइल फोटो)

भारत का स्कोर 17/5… और कपिल देव के वो ऐतिहासिक 175 रन
18 जून 1983 : भारत ने इस मैच में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वकप में ज़ोरदार वापसी की. 17 रन पर 5 विकेट गंवाने के बाद भारत पर विश्वकप से बाहर होने का ख़तरा मंडरा रहा था. कप्तान कपिल देव ने उस समय आकर ऐसी बल्लेबाज़ी की, जिसने भारतीय टीम के लिए संकटमोचक का काम किया. अफ़सोस की बात है कि बीबीसी की स्ट्राइक के कारण इस मैच का प्रसारण नहीं हो पाया और वनडे क्रिकेट की सबसे बेहतरीन पारियों में से एक, पूरी दुनिया से छिपी रह गई. कपिल देव ने 175 रनों की नाबाद पारी खेली और भारत का स्कोर 266/8 तक पहुंचाया. ज़िम्बाब्वे के केविन करेन ने 7 नंबर पर आकर 73 रनों की पारी खेली पर ज़िम्बाब्वे की टीम 235 रन ही बना सकी और भारत ने ये मैच 31 रनों से अपने नाम किया. मदनलाल ने 42 रन देकर 3 विकेट झटके.

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यशपाल शर्मा ने इस मैच में 40 रनों की अहम पारी खेली. (फोटो-ट्विटर)

भारत ने तय कर दी ऑस्ट्रेलिया की विदाई
20 जून 1983 : भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक तरह से यह क्वार्टर फाइनल था. जो टीम विजयी होती, उसी का इस विश्वकप में सफर आगे बढ़ता. भारत के लिए पिछली मैच में मिली हार का बदला लेने का यह सही मौका था. भारत ने यह मौक़ा बहुत अच्छे से भुनाते हुए ऑस्ट्रेलिया को चारों खाने चित कर दिया. भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 247 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया ने काफी अनुशासनहीन गेंदबाज़ी करते हुए 37 अतिरिक्त रन दिए. यशपाल शर्मा ने टीम के लिए सबसे ज़्यादा 40 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी भी बेहद खराब रही और पूरी टीम 129 रनों पर सिमट गई. भारत ने यह मुकाबला 118 रन से अपने नाम किया. इसी के साथ टीम वर्ल्ड कप से बाहर हो गई.

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सेमीफाइनल में इंग्लैंड को दी शिकस्त
22 जून 1983 : मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ भारत सेमीफाइनल में होगा, ये उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी. ख़ास तौर पर तब, जब भारत ने इंग्लैंड में इंग्लैंड से सभी 5 मुकाबले हारे थे. इस मैच में इंग्लैंड की टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी. इंग्लैंड की टीम एक समय तीन विकेट पर 141 रन बनाकर मजबूत स्कोर की ओर बढ़ रही थी, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड के आखिरी 7 विकेट 72 रनों में झटक कर इंग्लिश पारी को 213 रनों पर रोक दिया. भारतीय ओपनर्स ने टीम को सधी हुई शुरुआत देते हुए पहले विकेट के लिए 46 रन जोड़े और टीम को 5 विकेट से यह मैच जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई. मोहिंदर अमरनाथ ने शानदार 46 रनों की पारी खेली. उन्होंने गेंदबाज़ी के दौरान 2 विकेट झटककर ऑलराउंड प्रदर्शन किया और मैन ऑफ द मैच बने. इस तरह भारतीय टीम ने मेजबान इंग्लैंड को विश्व कप से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

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वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ कपिल देव. (फाइल फोटो)

25 जून 1983…और कपिल के हाथों में आया 75 करोड़ लोगों की उम्मीदों का कप
भारत की शुरुआत फाइनल में बहुत खराब रही. भारत ने पहले बल्लेबाज़ी की और पूरी टीम सिर्फ 183 रनों पर सिमट गई. इस समय तक भारतीय प्रशंसकों ने जीत की उम्मीद छोड़ दी थी और ये मान लिया था कि विश्व कप जीतने का सपना महज़ एक सपना रह जाएगा. लेकिन ये कपिल देव की वही टीम थी जिसने कभी हार न मानते हुए एक समय विश्वकप से बाहर होने की कगार से वापसी कर फाइनल में जगह बनाई थी. यहां भी ऐसा ही हुआ. भारतीय टीम ने कसी गेंदबाजी करते हुए वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया. वेस्टइंडीज की टीम भी अति आत्मविश्वास से खेल रही थी. शायद यही वजह रही कि विव रिचर्ड्स पारी जल्दी समेटने की फिराक में थे. एक समय बहुत ही संतुलित स्थिती में नजर आ रही इंडीज की टीम का ऐसा पतन हुआ जैसा किसी ने सोचा भी नही था. विव रिचर्ड्स 27 गेंद पर 33 रन बनाकर खेल रहे थे. अगली गेंद पर उन्होंने मदनलाल को लेग साइड पर छक्का मारना चाहा और फिर कपिल देव ने पीछे की ओर दौड़ते हुए ऐतिहासिक कैच पकड़ लिया. यह रिचर्ड्स का कैच पकड़ने से ज्यादा वर्ल्ड कप पकड़ने जैसा था. यहां से शुरू हुआ विंडीज की पारी का पतन रुका नहीं और पूरी टीम 140 रनों पर सिमट गई. भारत ने इंडीज को 43 रनों से हरा दिया. भारत विश्व विजेता बन चुका था. पूरे देश ने मिलकर जो सपना इतने सालों से देखा था, कपिल देव के धुरंधरों ने उसे पूरा कर दिया. लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर भारत ने जीत का परचम फहराया और विश्व चैंपियन बन कर दुनिया को बता दिया कि भारतीय क्रिकेट में अब एक नया सवेरा हो चुका है.





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