National News

10 days before murder was thrown at Bapu bomb | हत्या के 10 दिन पहले बापू पर फेंका गया था बम, बिलासपुर के रामचंद्र ने आरोपी को पकड़ा था


  • राष्ट्रपति ने रामचंद्र दुआ को कीर्ति चक्र से किया था सम्मानित
  • दुआ 20 जनवरी 1948 को अपने पिता को प्रार्थना सभा में लेकर गए थे

बिलासपुर (अनुपम सिंह) . 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। कम लोग ही जानते हैं कि इससे ठीक 10 दिन पहले भी बापू की हत्या की कोशिश की गई थी। बिड़ला हाउस में  20 जनवरी 1948 को शाम की प्रार्थना कर रहे बापू पर बम फेंका गया था। बम फेंक कर रहे भाग रहे मदनलाल को बिलासपुर के रामचंद्र दुआ ने पकड़ा था। शौर्य प्रदर्शन के लिए देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें 1953 में कीर्ति चक्र से भी सम्मानित किया था।

 

पिता को लेकर प्रार्थना सभा में गए थे दुआ

 

एयरफोर्स में सार्जेंट दुआ उस दिन अपने पिता को प्रार्थना सभा लेकर गए हुए थे। कुछ समय पहले दुआ का निधन हो गया। उनका परिवार आज भी बिलासपुर के आदर्श कॉलोनी, दयालबंद में रहता है। 20 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में महात्मा गांधी रोज की तरह प्रार्थना सभा के बाद वहां मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान किसी ने उनके मंच की तरफ हैंड ग्रेनेड फेंका। बापू तो इससे बच गए, लेकिन पास की दीवार टूट गई। वहां भगदड़ मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे। बिलासपुर के गांधी चौक के पास रहने वाले उनके भांजे कीर्ति गुरुदत्ता ने बताया, “वे (दुआ) बम फेंकने वाले के पीछे दौड़े और कुछ दूर जाकर उसे पकड़ लिया। पुलिस के वहां आने तक उन्होंने आरोपी को पकड़कर रखा। पूछताछ में उसने अपना नाम मदनलाल बताया।” 

 

मदनलाल ने यह भी बताया कि घटना के दौरान वहां पर नाथूराम गोडसे, विनायक गोडसे और करकरे भी मौजूद थे। रामचंद्र के बेटे कमल दुआ के मुताबिक, “अगर थोड़ी सावधानी बरती जाती और बापू अपनी सुरक्षा को लेकर संजीदे होते तो शायद 30 जनवरी 1948 की घटना टाली जा सकती थी।” 

19 जनवरी 1952 को कीर्ति चक्र मिलने की खबर मिली थी : कमल दुआ के बेटे बताते हैं कि 19 जनवरी 1952 को राजपत्र में उनके पिता को बापू पर बम फेंकने वाले को पकड़ने का शौर्य दिखाने के कारण कीर्ति चक्र से सम्मानित करने की सूचना प्रकाशित हुई थी। 10 अगस्त 1953 को राष्ट्रपति भवन से सम्मान प्राप्त करने के लिए आमंत्रण मिला। 15 अगस्त 1953 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कीर्ति चक्र से सम्मानित किया।

 

मनुबेन की किताब में है घटना का जिक्र : महात्मा गांधी की सहयोगी रहीं मनुबेन ने अपनी किताब अंतिम झांकी में 20 जनवरी 1948 की घटना का जिक्र किया है। डायरीनुमा किताब में वे लिखती हैं शाम का समय था। बापू की प्रार्थना के बाद प्रवचन के दौरान अचानक जोर का धमाका हुआ। सब लोग यहां-वहां भागने लगे। मैं बापू के पास ही खड़ी थी। मैंने बापू के पैर पकड़ लिए। बापू ने कहा- डर क्यों रही हो। सैनिक गोलीबारी की तालीम ले रहे होंगे, इतना कहते हुए बापू ने प्रवचन जारी रखा। कुछ देर बाद पता चला कि बापू पर ही बम फेंका गया था। बम फेंकने वाले को पकड़ भी लिया गया था।





Source link

About the author

Non Author

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.