हिंदी न्यूज़ – SPOILER : फिल्म ‘केसरी’ में ज़िंदा नहीं बचेंगे अक्षय कुमार, जानिए सारागढ़ी की लड़ाई का पूरा सच | spoiler kesari movie akshay kumar die in the film here is full movie review before its release

0
4


अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘केसरी’ की रिलीज़ 21 मार्च को तय हो चुकी है और इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज़ होते ही ट्रेंड हो रहा है. भारत में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान अफगान पाकिस्तान सीमा पर लगे एक छोटे से गाँव सारागढ़ी की सुरक्षा के लिए तैनात 21 सिख जवानों ने इस पोस्ट की रक्षा के लिए 10 हजार अफ़गान लड़ाकों से जूझते हुए अपनी जान दे दी थी. इस फिल्म के ट्रेलर के रिलीज़ के बाद लोगों की इस फिल्म में दिलचस्पी बढ़ गई है. लेकिन सिख समुदाय की वीरता की कहानी कहती इस फिल्म में क्या होने वाला है इसके लिए आपको मार्च तक का इंतज़ार नहीं करना होगा. हम आपको बताते हैं सारागढ़ी की लड़ाई के बारे में.

सारागढ़ी की लड़ाई में अक्षय कुमार और उनकी 21 जवानों की टुकड़ी का काम ब्रिटिश हुकूमत के दो किलों ‘फोर्ट गुलिस्तां’ और ‘फोर्ट लॉकहर्ट’ के बीच बने एक गाँव सारागढ़ी से सिग्नल भेजने और दोनों किलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी टुकड़ी के जिम्मे थी. अक्षय कुमार इस छोटी सी टुकड़ी के सरगना इशर सिंह के रोल में नज़र आएंगे जो इन 21 जवानों को लेकर 10 हज़ार अफगान सैनिकों से लड़ जाते हैं. दुनिया के इतिहास में इस टुकड़ी की वीरता की मिसाल दी जाती है.

इस फिल्म में अक्षय कुमार के किरदार को आप मरते हुए देखेंगे. हवलदार इशर सिंह का किरदार निभा रहे अक्षय कुमार इस फिल्म में एक मोड़ पर अकेले पूरी अफगान फौज से भिड़ जाएंगे. दरअसल जब सारागढ़ी पर अफगान लड़ाकों का हमला हुआ तो बहुत देर तक इन 21 जवानों ने उन्हें रोक कर रखा लेकिन फिर एक दीवार गिरने के बाद कुछ पश्तून अंदर आ गए.

अपने साथियों को बचाने के लिए हवलदार इशर सिंह ने अकेले बाहर रहकर लड़ने का फैसला किया और अपने साथियों को अंदर भेज दिया. ईशर सिंह ने अकेले कई अफगानों को मारा और वो वीरगति को प्राप्त हुए.

इस लड़ाई का सबसे वीर योद्धा था सिग्नल मैन गुरुमुख सिंह. गुरुमुख सिंह इस पूरी लड़ाई का हाल लगातार फोर्ट लॉकहर्ट को पहुंचा रहा था. इस सिपाही ने आखिरी दम तक अपनी ड्यूटी निभाई और फिर अपने अंग्रेज़ कमांडर से परमिशन मांग कर बंदूक उठाई. फोर्ट लॉकहर्ट में बैठे अंग्रेज़ सैनिक सिर्फ सिग्नल रुम को दूरबीन से देख पा रहे थे.

जब अफगान लड़ाकों ने वहां प्रवेश किया तो बहुत देर तक कोई हरकत नहीं हुई और फिर उन्होंने एक भारतीय सिपाही को अकेले कई लोगों से लड़ते देखा और फिर वहां आग लग गई. दो दिन बाद पहुंची अंग्रेज़ टुकड़ी ने बताया कि इस सिग्नल रुम के बाहर लगभग 20 से 30 अफगान सिपाहियों की लाशें वहां पड़ीं थी जिन्हें ज़ाहिर तौर पर गुरुमुख सिंह ने अकेले मारा था.

इस लड़ाई में ब्रिटिश फौजों की अपर्याप्त मदद के चलते ही उन 21 भारतीय सिपाहियों को अपनी जान देनी पड़ी थी. ब्रिटिश सेना में 36 सिख बटालियन आज भारतीय सेना में 4 सिख रेजिमेंट के नाम से जानी जाती है और इन सिपाहियों के बलिदान को हमेशा याद किया जाता है.

ईशर सिंह और उनके 21 जवानों की बहादुरी के आगे हारकर अफगान जनरल ने उन्हें पैसे और पद की पेशकश की थी. गद्दारी कर जान बचाना इस टुकड़ी के लिए आसान भी था लेकिन ईशर सिंह और उनके सिपाहियों ने सम्मान के आगे जान नहीं दी. इन सिपाहियों की याद में भारत सरकार की ओर से सारागढ़ी में एक मेमोरियल भी बनाया गया है और ब्रिटिश सरकार भी इन सिपाहियों के बलिदान को 12 सितंबर को याद करती है.
यहां देखें फ़िल्म का ट्रेलर…

साल 1994 में बनी थीं मिस यूनिवर्स, आज तक मेंटेन है सुष्मिता सेन की वही फिटनेस…
पाकिस्‍तान को शाहरुख खान ने दी 45 करोड़ की मदद? जानें Viral Video की हक़ीकत

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी WhatsApp अपडेट्स





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here