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हम बच्चों को खेलने नहीं देते और ओलंपिक मेडल भी चाहते हैं: कपिल देव

कपिल देव (फ़ाइल फोटो)

Ankit Francis

Ankit Francis

| News18Hindi

Updated: December 8, 2018, 11:57 AM IST

दिल्ली में आयोजित ‘जागरण फोरम’ कार्यक्रम के दूसरे दिन शनिवार को पूर्व क्रिकेटर कपिल देव ने स्पोर्ट्स से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि हमारा देश खेलों को गंभीरता से नहीं लेता लेकिन हम सभी ओलंपिक मेडल की उम्मीद लगाए रहते हैं. कपिल ने आगे कहा कि जब तक मां-बाप नहीं चाहेंगे कि बच्चा स्पोर्ट्समैन बने तो देश को अच्छे खिलाड़ी कभी नहीं मिल पाएंगे. क्रिकेट बॉल को लेकर जारी विवाद पर कपिल ने कहा कि हम बाकी देशों में उनकी गेंद से खेलते हैं तो उन्हें हमारे यहां हमारी गेंद से खेलना चाहिए.

कपिल ने कहा कि मां-बाप इंग्लिश ट्यूशन के लिए 5000 रुपए दे देते हैं लेकिन क्रिकेट कोचिंग के लिए 1000 रुपए देने में भी हिचकते हैं. हम स्पोर्ट्स देखने में यकीन रखते हैं लेकिन खेलने पर हमारा यकीन नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि माता-पिता बच्चों के साथ आते हैं और मुझसे चाहते हैं कि उनका बच्चा आईपीएल खेले क्तोंकी वहां पैसा है. अब कबड्डी जैसे खेलों में भी पैसा आना शुरू हो गया है इसलिए बदलाव आ रहा है. इसे ऐसे समझिये कि देश में कितने इंजीनियरिंग कॉलेज हैं और कितनी स्पोर्ट्स एकेडमी हैं ? यूरोप या अमेरिका की बात करें तो अगर बच्चा जूनियर्स में देश का प्रतिनिधित्व करता है तो माता-पिता स्कूलिंग में उसका ईयर ड्रॉप करने से मना नहीं करते लेकिन भारत में कोई ऐसा सोच भी नहीं सकता.

फिलहाल जारी इंडिया-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट क्रिकेट सीरीज में टीम इंडिया की जीत के अवसरों के बारे में कपिल ने कहा कि कहीं भी जीतने के लिए ही जाना चाहिए और हार भी जाओ तो इसे बहुत दिल पर नहीं लेना चाहिए. बॉल टेम्परिंग के लिए नाखून के इस्तेमाल की छूट मिलने से जुड़े एक सवाल के जवाब में कपिल ने कहा कि ये तो नियमों में बदलाव का मामला है और अगर सब इस पर सहमत होते हैं तो कोई दिक्कत नहीं है. डेविड वार्नर और स्टीव स्मिथ पर कि गई कार्रवाई को उन्होंने काफी कड़ा बताया लेकिन ये भी कहा कि अगर कोई टीम मिलकर टेम्परिंग करना तय करती ई तो ये काफी शर्मनाक है.

कार्यक्रम में पूर्व टेनिस खिलाड़ी रमेश कृष्णन ने भारत में स्पोर्ट्स किए महत्त्व से जुड़े एक सवाल में कहा कि हम तरक्की कर रहे हैं लेकिन मुझे लगता है कि और मेहतन की ज़रुरत है. ये कहना कि 120 करोड़ लोगों के देश में इतने कम ओलम्पिक मैडल क्यों इसका जवाब ये भी भी कि देश में सब तो स्पोर्ट्स खेलंगे भी नहीं, स्पोर्ट्स को सपोर्ट मिले तो शायद ज्यादा लोग खेल की तरफ आकर्षित हो. क्रिकेट के बाकी खेलों पर दबाव से जुड़े सवाल के जवाब में रमेश ने कहा कि इसे ऐसा नहीं देखा जाना चाहिए. क्रिकेट को कोसने की जगह हमें बाकी स्पोर्ट्स को आगे बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. टेनिस से जुड़े सवाल के जवाब में रमेश ने कहा कि भारत तरक्की कर रहा है

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