Bollwood News

हिंदी न्यूज़ – Gully Boy के ज़माने में याद कीजिए ‘चमेली की शादी’ वाला प्यार : अमृता सिंह | chameli ki shadi love story in valentine day 2019 and ranveer singh gully boy famous love story aks


हां तो जनाब वेलेनटाइन डे के अवसर पर जब हम सब प्रेम की पींगे मार रहे हैं तो आपको उन दिनों की कहानी सुनाते हैं, जब प्रेम को भूमंडलीकरण के पंख नहीं लगे थे और प्रेम मुहल्ले में फलता फूलता था. मतलब ये कि चमेली का मोहल्ले के लड़के चरनदास से लपड़-झपड़ चलता था तिस पर दोनों की बिरादरी भी अलग थी और प्रेमी युगल को साथ देखे जाने की खबर पूरे मोहल्ले में जंगल की आग की तरह फैल जाती थी. तब प्रेम कुछ यूं परवान चढ़ता था…

नायक: मै हायर सेकेंड्री पास हूं  

नायिका (ठिटोली करती है): मुझे पता है, थर्ड डिवीज़न

नायक (सफाई देता है): तो क्या हुआ फेल होने से तो अच्छा है ननायिका (गुस्से मे): मै फेल होती हूं तो तुझे क्या?

नायक (स्थिति को सभांलने की कोशिश करता है): मै भी आठवीं में एक बार फेल हुआ था

नायिका (पूरे दंभ से): मै चार बार फेल हुई हूं

नायक: अब कौन से क्लास में हो?

नायिका (भोलेपन से): आठवीं में

फिर कोयले का भाव बीच में आता है, जी हां, प्यार में कुछ न कुछ तो बीच में आता ही है…तो यहां कोयले का भाव बीच में आ गया   

दूसरे दृश्य में नायक नायिका के स्कूल पहुंचता है

नायक:  मुझे पता है तुमने ही कोयले की बोरी भेजवाई है…कंट्रोल रेट से है न?

नायिका (शर्माते हुए):  तो क्या तुमसे ज्यादा लूंगी

नायक:  ये लो चालीस रुपए बीस पैसे

नायिका (गुस्से में):  बस-बस, रखो अपने पैसे अपने पास

नायक : क्यों? मैं किसी का उधार नहीं रखता

नायिका : उधार नहीं, तो मेरी अमानत समझकर अपने पास रखलो, जब वक्त आएगा तब वसूल करूंगी (शर्माते हुए)

फिल्म है बासु चटर्जी द्वारा निर्देशित ‘चमेली की शादी’ और मामला है, चमेली (अमृता सिंह) और चरनदास (अनिल कपूर) का. 1986 में आई ये फिल्म आज भी रोमांचित करती है, कभी सोंचा है क्यों? क्योंकि ये फिल्म कहीं न कहीं हमें परफेक्शन, आधुनिकता और बाज़ारवाद के बोझ से छुटकारा दिलाती है. यहां चमेली और चरनदास एक दूसरे से परफेक्ट होने की उम्मीद नहीं करते, एक हायर सेकेंड्री थर्ड डिवीज़न से पास होता है तो दूसरी आठवीं में चार बार फेल, फिर भी दोनो को प्रेम हो जाता है. प्यार की पहली सौगात फूल, गुलदस्ता या उपहार की जगह कोयले की बोरी है, जिसे चमेली चरनदास के घर भेजवाती है वो भी कंट्रोल रेट से.

दरअसल अपने प्यार के लिए अपने पिता कल्लूमल के खिलाफ ये चमेली की पहली बगावत है, क्योंकि कल्लूमल कोयले वाला साठ रुपए बोरी कोयला बेचता है, और चरनदास को कोयला कंट्रोल रेट पर चाहिए. तो चमेली ने कर दी बगावत और भेज दी चरनदास को एक बोरी कोयले की अमानत.

ये प्यार मोबाइल और व्हाट्सएप के जमाने का नहीं है तो हाल-ए-दिल ख़तों के जरिए साझा किए जाते है. लेकिन दोनों ही प्यार में सोफेस्टिकेटेड होने के इल्म से वाकिफ नहीं है, इन्हें अपना इश्क मुकम्मल करने की जल्दबाजी है. एक तरफ चरनदास पहले खत में ही मिलने से लेकर शादी तक सब तय कर लेना चाहता है तो दूसरी तरफ चमेली पहली ही चिट्ठी में निसंकोच मेरे प्यारे चरनदास लिख देना चाहती है. आज के नौजवानों की तरह इन्हें प्यार को ले कर दुविधा या कन्फ्यूजन नहीं हैं, मामला क्लियरकट है कि दोनों को एक दूसरे से प्यार है.

कौन है ये शख्स जिसने खुलेआम सपना चौधरी को किया Kiss, वीडियो हुआ Viral

अपनी सहेली के दुनियादारी समझाने के बावजूद चमेली चरनदास पर दो हजार कमाने का दबाव नहीं बनाती, चिट्ठी में संकोच करते हुए केवल सात सौ रूपए कमाने के लिए कहती है. वो चरनदास पर जिम्मेदार बनने का बोझ नहीं लादती जैसा ‘मनमर्जियां’ की रूमी (तापसी पन्नू) विकी (विकी कौशल) पर लादती है और विकी के जिम्मेदार न बनने पर भागने का प्लान छोड़कर, गुस्से में कहती है “आदमी तो तू बहुत सही है, लेकिन जिम्मेदारी के नाम पर तू हग देता है,” मानो प्यार में जिम्मेदार होना शर्त हो गई और जब ब्वायफ्रेंड की रोजी-रोटी की इंतजाम नहीं हुआ तो एक एनआरआई का विकल्प खुला है.

लेकिन चमेली को ऐसे किसी विकल्प की जरूरत नही है वो जब पहली बार एक महंगे रेस्टोरेंट में चरनदास से मिलती है तो आधुनिक प्रेम की पेमेंट वाली मान्यता रद्द करते हुए चरनदास से कहती है “आज का बिल मैं दूंगी…खाओ-खाओ मेरे पास बहुत पैसा है”

इधर चरनदास भी मस्तराम अखाड़े की प्रतिज्ञा तोड़ देता है, दरअसल इस प्रतिज्ञा का टूटना स्वतंत्रता का द्योतक है, जिससे एक व्यस्क मुक्त हो जाता है उन सारे बंधनों से जो प्रेम के रास्ते में आते हैं. जब कल्लूमल चमेली की शादी बिरादरी के लड़के से करवाना चाहता है तो  चमेली अपने कमरे की दीवार पर बिंदास लिख देती है मैं चरनदास से ही शादी करूंगी और चमेली और चरनदास को मिलाने के लिए मोहल्ले के सारे दोस्त एड़ी-चोटी एक कर देते हैं.

क्या ऐश्वर्या और ऋतिक के KISS पर नाराज हो गए अभिषेक बच्चन?

चमेली भी अपने बाबूजी के “जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिन्दगी” जैसे किसी डायलॉग का इंतज़ार नहीं करती, बस भाग जाती है अपने चरनदास के साथ, क्योकि उसे पता था कि कोई रीति-रिवाज इसकी इजाज़त दे या न दे, कानून इसकी इजाज़त देता है.

चमेली तो अपने चरन दास से बस इतना ही कहती है कि “उतर आई अखाड़े में तेरे सपनों की रानी, दम है तो आ कर ले प्यार में पहलवानी…” और चरनदास भी दुनिया को ललकारते हुए कह देता है “मुहब्बत के दुशमन ज़रा होश में आ…”

अब आते हैं अपने सवाल पर कि ये फिल्म हमें आज भी क्यों रोमांचित करती है, दरअसल ये फिल्म हमें रीति-रिवाज और जाति के बंधनों से मुक्त हो कर प्रेम करने का मौका देती है. आज का नौजवान प्रेम तो करना चाहता है लेकिन उसे एक मुकम्मल नाम देने में कन्फ्यूज रहता है ऐसे कन्फ्यूज़ड लोगों को आइना दिखाती है ये फिल्म कि जो करो डंके की चोट पर करो और इन सबसे बढ़कर ये फिल्म उपहार, बाज़ार, रेस्टोरेंट, सीसीडी, कॉफी, जिम्मेदारी, ईमानदारी, मां, बाप, रिश्तेदार इन सबका बोझ इश्क से उतार देती है और इश्क को आज़ाद कर देती है, सिर्फ इश्क करने के लिए.

ये फिल्म सिखाती है कि प्रेम में परिपक्वता से ज्यादा साहस की जरूरत होती है इसीलिए ‘चमेली की शादी’ बिना कंफ्यूज़न विशुद्ध प्रेम की कहानी कहती है. तो दोस्तों इस बार सारे बंधनों से मुक्त हो कर सिर्फ इश्क करिए क्योंकि इश्क सबसे आसान इबादत है….

(लेखिका अमृता सिंह एक स्वतंत्र लेखिका हैं और इन दिनों बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सिनेमा शोधार्थी के तौर पर अपना शोध कर रही हैं. लेख से ज़ाहिर है, वो सिनेमाप्रेमी भी हैं…)

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पाससब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsAppअपडेट्स

 





Source link

About the author

Non Author

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.