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दुनिया में पहली बार मृत डोनर के गर्भाशय से हुआ बच्ची का जन्म | Baby is born via a uterus transplanted from a DEAD donor in world first


मिला एक नया ऑप्‍शन

मिला एक नया ऑप्‍शन

शोधकर्ताओं की मानें तो इस सफल ट्रांसप्लांट और बच्ची के जन्म के बाद दुनियाभर की उन हजारों महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद जगी है जो गर्भाशय से जुड़ी तमाम दिक्कतों की वजह से मां बनने और बच्चे को जन्म देने में असमर्थ हैं। इस ट्रांसप्लांट की सफलता से पहले तक इन्फर्टिलिटी और यूट्रस से जुड़ी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के पास मां बनने के सिर्फ 2 ही रास्ते थे- या तो वे बच्चे को गोद लें या फिर सरोगेसी का सहारा लें।

500 में से 1 महिला को है गर्भाशय से जुड़ी समस्‍या

500 में से 1 महिला को है गर्भाशय से जुड़ी समस्‍या

दुनियाभर में करीब 10 से 15 प्रतिशत कपल्स ऐसे हैं जो इन्फर्टिलिटी के शिकार हैं और हर 500 में से 1 महिला ऐसी है जो गर्भाशय से जुड़ी समस्या का सामना कर रही है। ऐसे में उनके लिए प्रेग्नेंट होना और 9 महीने तक बच्चे को अपनी कोख में रखना संभवन हीं हो पाता। शोधकर्ताओं का मानना है कि दुनियाभर की वैसी महिलाएं जो गर्भाशय से जुड़ी समस्या की वजह से बांझपन झेल रही हैं उनके लिए नई संभावनाएं मौजूद हैं।

सफल रही यूट्रस ट्रांसप्लांट की सर्जरी

सफल रही यूट्रस ट्रांसप्लांट की सर्जरी

इस केस में गर्भाशय डोनेट करने वाली महिला 45 साल की थी जिसकी स्ट्रोक की वजह से मौत हो गई थी। वहीं गर्भाशय पाने वाली महिला 32 साल की थी और जन्म से ही उसके शरीर में यूट्रस यानी गर्भाशय नहीं था जो अपने आप में एक अजीब और रेयर बीमारी है।

ट्रांसप्लांट से 4 महीने पहले उस महिला का आईवीएफ किया गया जिसके बाद उसके 8 एग्स फर्टिलाइज हुई जिन्हें फ्रीजिंग के जरिए प्रिजर्व किया गया। गर्भाशय ट्रांसप्लांट की सर्जरी करीब 10 घंटे तक चली। सर्जरी कर रहे डॉक्टरों ने डोनर के गर्भाशय की वेन्स, आर्टरी, लिगामेंट्स और वजाइनल कैनाल को प्राप्तकर्ता के शरीर से जोड़ा। महिला का शरीर नए अंग को कहीं अस्वीकार न कर दे, इसके लिए उसे 5 अलग-अलग तरह की दवाएं दी गईं।

सफल रही यूट्रस ट्रांसप्लांट की सर्जरी

सफल रही यूट्रस ट्रांसप्लांट की सर्जरी

इस केस में गर्भाशय डोनेट करने वाली महिला 45 साल की थी जिसकी स्ट्रोक की वजह से मौत हो गई थी। वहीं गर्भाशय पाने वाली महिला 32 साल की थी और जन्म से ही उसके शरीर में यूट्रस यानी गर्भाशय नहीं था जो अपने आप में एक अजीब और रेयर बीमारी है।

ट्रांसप्लांट से 4 महीने पहले उस महिला का आईवीएफ किया गया जिसके बाद उसके 8 एग्स फर्टिलाइज हुई जिन्हें फ्रीजिंग के जरिए प्रिजर्व किया गया। गर्भाशय ट्रांसप्लांट की सर्जरी करीब 10 घंटे तक चली। सर्जरी कर रहे डॉक्टरों ने डोनर के गर्भाशय की वेन्स, आर्टरी, लिगामेंट्स और वजाइनल कैनाल को प्राप्तकर्ता के शरीर से जोड़ा। महिला का शरीर नए अंग को कहीं अस्वीकार न कर दे, इसके लिए उसे 5 अलग-अलग तरह की दवाएं दी गईं।

भारत में हो चुका है ये चमत्‍कार

भारत में हो चुका है ये चमत्‍कार

गौरतलब है कि गर्भाश्य ट्रांसप्लांट के जरिये महाराष्ट्र के पुणे में भी एक महिला बच्चे को जन्म दे चुकी है। खास बात यह है कि इस बच्ची ने अपनी नानी के गर्भाशय से जन्म लिया था, जिसने कभी उसकी मां को जन्म दिया था। लेकिन इस केस में गर्भाशय देने वाली महिला जीवित थी।





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